ब्यूरो/अमर उजाला, साहिया
75 साल बाद महासू देवता खत ऊपल के बिसाई गांव में पधारेंगे। देवता के आगमन के लिए क्षेत्र में तैयारियां शुरू हो गई हैं। इसके लिए देवदार की लकड़ियों से बने लगभग 185 साल पुराने भवन को दुरुस्त किया जा रहा है।
देवता के आगमन की जानकारी मिलते ही खत वासियों ने देवता की पालकी, छड़ी और डोरिया के साथ ही कई देव चिह्नों को बनाने का काम शुरू कर दिया है। देवता के बिसोई गांव पहुंचने को लेकर लोगों में खासा उत्साह है। देखरेख के अभाव में खंडहर हो चुके देवदार की लकड़ियों से बने लगभग 185 साल पुराने भवन में वर्षों पूर्व महासू देवता की पूजा अर्चना होती थी। 75 साल पहले वहां से देवता की डोली प्रवास के लिए निथला गांव ले जाई गई थी। डोली एक बार फिर से उसी भवन में लाई जा रही है। इसीलिए ग्रामीणों की ओर से भवन को ठीक कराया जा रहा है। मोहर सिंह चौहान ने बताया कि जर्जर भवन को बिसोई, निथला, रिखाड़, ठाणा, टुगरा, मठायसा आदि के ग्रामीणों द्वारा ठीक किया जा रहा है। जून और जुलाई माह में जागड़े की तैयारियां भी खत वासियों ने अभी से शुरू कर दीं हैं। बिसोई गांव के टीकम सिंह चौहान ने बताया कि देवता के स्वागत के लिए तमाम कार्य किए जा रहे हैं।