ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश। एम्स में आयोजित मनोरोग प्रशिक्षण कार्यशाला के दौरान डॉ. विक्रम सिंह रावत ने कहा कि आमतौर पर सामान्य व गंभीर मानसिक बीमारियां होती हैं। आम बीमारी में उदासी की परेशानी, डिप्रेशन में मरीज को गहन उदासी का अनुभव होता है। एम्स के निदेशक प्रो. रवि कांत ने कहा कि मानसिक रोगों के प्रति लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता है। प्राइमरी हेल्थ सेंटर में कार्यरत चिकित्सक इस मामले में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
इस मौके पर डॉ. अनिंद्या दास ने बताया कि सामान्य मानसिक बीमारी में अकारण घबराहट की परेशानी, दिमाग में तरह तरह के विचारों के चलते रहना, चिंता में डूबे रहना हाथ पैरों में कंपन व पसीना आना, सीने में जकड़न व दिल का तेजी से धड़कना आदि लक्षण मिलते हैं। इस अवसर पर डॉ. विशाल धीमान, डॉ. जितेंद्र रोहिला, डॉ. अनुरुद्ध वासू, डॉ. मंजूनाथ व डॉ. संतोष आदि मौजूद थे।
बार नशे का मूड हो तो खुद को समझो मनोरोगी
निम्हांस से आई प्रो. प्रभा चंद्रा ने कहा कि शराब, अफीम व अन्य प्रकार का नशा करने से भी व्यक्ति इस तरह के रोग से ग्रस्त होने लगते हैं। ऐसे रोगियों को बार बार नशा करने का मन करता है और समय के साथ-साथ ज्यादा नशा लेने की जरूरत पड़ने लगती है। नशा नहीं लेने की स्थिति में शरीर पर असहनीय प्रभाव होते हैं, लिहाजा मरीज को नशा लेना ही पड़ता है जिससे उसका पूरा ध्यान इसी में अटक जाता है।
शक भी है बीमारी का लक्षण
डॉ. नवीन ने बताया कि सिजोफ्रेनिया, साइकोसिस जैसी बाईपोलर डिस्ऑर्डर गंभीर बीमारियां होती हैं। इनमें रोगी को शक, बहम, कानों में कुछ आवाजें सुनाई देने की शिकायत रहती है। इस स्थिति में मन के भाव में बार बार परिवर्तन होता है। इस स्थिति में रोगी गहन उदासी में रहता है। एम्स मनोरोग विभागाध्यक्ष डॉ. रवि गुप्ता ने बताया कि कार्यशाला का उद्देश्य पीएचसी को आम मानसिक बीमारियों के बारे में सजग करना है, जिससे चिकित्सक मरीज में इन बीमारियों की अपने स्तर से पहचान कर प्राथमिक उपचार शुरू कर सकें।