श्रीनगर। केंद्रीय पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री उमा भारती और मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने करीब सात हजार लोगों, अधिकारियों, स्कूली बच्चों और सुरक्षा बलों को श्रीनगर में स्वच्छ गंगा व निर्मल गंगा और स्वच्छ भारत अभियान की शपथ दिलाई। इसके अलावा उन्होंने लगभग 14 करोड़ की लागत से निर्मित स्नान घाटों का लोकार्पण किया।
शुक्रवार को जीआईएंडटीआई मैदान में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत गंगा स्वच्छता सम्मेलन आयोजित कर स्वच्छता की शपथ दिलाई गई। इस मौके पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने कहा कि 25 दिसंबर को प्रदेश में अटल आयुष्मान भारत स्वास्थ्य योजना शुरू की जा रही है, जबकि इस माह के अंत तक विद्युत से वंचित प्रदेश के 15 हजार परिवारों को सौभाग्य योजना के तहत आच्छादित कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड पहला ऐसा राज्य जिसने केंद्र की ई-फ्लो नीति के तहत नदियों में 15 फीसदी जल प्रवाह के नियम को लागू किया है।
केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने कहा कि जिस प्रकार उत्तराखंड वर्ष 2017 में ओडीएफ हो गया। उन्हें विश्वास है कि यह प्रदेश देश का सर्वप्रथम ओडीएफ प्लस राज्य होगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की जिम्मेदारी है कि गंगा का पानी अविरल रहे और यूपी की जिम्मेदारी है कि पानी निर्मल रहे। राज्य मंत्री डा. धन सिंह रावत ने कहा कि सीएम ने श्रीकोट गंगानाली व श्रीनगर में स्टेडियम निर्माण और प्रेक्षागृह के लिए रेलवे से वार्ता की है, जिसको रेलवे ने सहमति दी है। उन्होंने कहा कि जब तक वह विधायक हैं, तब तक एनआईटी शिफ्ट होने का सवाल ही नहीं है। केंद्रीय पेयजल सचिव परमेश्वरन अय्यर ने बताया कि यह पांचवां सम्मेलन है।
श्रीनगर को पार्किंग की सौगात
गंगा स्वच्छता सम्मेलन में पहुंचे मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने श्रीनगर में वाहन पार्किंग, उद्यान विभाग की श्रीनगर नर्सरी की सुरक्षा दीवार के पुनर्निर्माण, रैन बसेरा श्रीनगर के सौंदर्यीकरण और पैठाणी में टैक्सी स्टैंड निर्माण की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने गंगा स्वच्छता पर आधारित गीत प्रस्तुत करने वाले बच्चों को 51 हजार रुपये देने की भी स्वीकृति दी।
पांच लोगों को किया सम्मानित
पर्यावरण एवं स्वच्छता के क्षेत्र में काम करने वाले पांच लोगों को सम्मानित किया गया। पर्यावरण मित्र रामदयाल व रीता, डा. बीपी नैथानी, भवान सिंह और अपर आयुक्त हरक सिंह को स्मृति चिह्न दिया गया।
हर तरफ बच्चों की फजीहत
कार्यक्रम के समापन होने के बाद कार्यक्रम में पहुंचे बच्चों को बहुत फजीहत झेलनी पड़ी। सैकड़ों लोगों की भीड़ में भूखे-प्यासे बच्चे फंसकर रह गए। उनको कार्यक्रम स्थल से बाहर जाने का रास्ता नहीं मिल पाया। रही सही कसर अधिकारियों के वाहनों ने निकाल दी।