देवाल। लघु सिंचाई विभाग की ओर से स्वीकृत पोखरीगाड़-पलबरा नहर का निर्माण पांच साल में भी पूरा नहीं किया गया है। विभाग की ओर से तीन किमी लंबी नहर के नाम पर महज ढाई सौ मीटर पाइप लाइन बनाकर इतिश्री कर दी गई। बीडीसी बैठक में यह मामला उठने के बाद अब विभाग ने इसकी जांच शुरू कर दी है। विभागीय टीम मौके पर पहुंची और नहर का निरीक्षण किया। टीम जल्द जांच पूरी कर रिपोर्ट ईई को सौंपेगी।
वर्ष 2012-13 में लघु सिंचाई विभाग की ओर से पोखरीगाड़-पलबरा सिंचाई योजना पर काम शुरू किया गया। 32.69 लाख रुपये की लागत से बनने वाली तीन किमी सिंचाई नहर का निर्माण वर्ष 2013 में पूरा हो जाना था। योजना के तहत 3 इंच की 2100 मीटर पाइप लाइन, 900 मीटर की नहर और 3 टैंक बनने थे लेकिन अभी तक काम पूरा ही नहीं हुआ। क्षेत्र पंचायत सदस्य रविंद्र सिंह ने बताया कि इस मामले को 28 सितंबर की बीडीसी बैठक में उठाया गया। बताया गया कि विभाग की ओर से नहर का काम पांच साल में भी पूरा नहीं हुआ है। केवल लीपापोती कर लाखों की वित्तीय अनियमितता की गई है। बीडीसी बैठक में जांच के आदेश मिले। अब टीम ने मौके पर पहुंचकर मामले की जांच शुरू कर दी है। जांच अधिकारी विभाग के एई जेरएस नेगी ने बताया कि मौके पर महज ढाई सौ मीटर की पाइप लाइन ही मिली। नहर पर कितनी धनराशि का भुगतान हुआ इसकी जांच की जा रही है। रिपोर्ट बनाकर उच्चाधिकारियों को भेजी जा रही है। वहीं लघु सिंचाई विभाग के ईई दीपांकर भारती ने बताया कि ठेकेदार की ओर से निर्माण कार्य किया जा रहा है। मामले की रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई की जाएगी।
तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित
गैरसैंण। ब्लाक के मैखोली ग्राम पंचायत में वर्ष 2009 से 2014 तक हुए विकास कार्यों की जांच के लिए खंड विकास अधिकारी ने तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित कर दी है। खंड विकास अधिकारी जगत सिंह नेे बताया कि ग्राम पंचायत में शौचालयों के निर्माण सहित अन्य विकास कार्यों की जांच की मांग ग्रामीणों ने की थी। समिति में खंड विकास अधिकारी जगत सिंह सहित सहायक समाज कल्याण अधिकारी संदीप चौधरी और लघु सिंचाई विभाग के अवर अभियंता अमित कुमार पाल शामिल थे।