ब्यूरो/अमर उजाला/ऋषिकेश।
किसी भी प्रकार का आरक्षण समाज में शराफत को कमजोर व धूर्तता को मजबूत करता है। आरक्षण सिर्फ व्यक्ति की प्रवृत्ति के आधार पर दिया जाना चाहिए।
ये बातें रविवार को देहरादून रोड स्थित बजरंग मुनि सामाजिक शोध संस्थान कार्यालय मेें बजरंग मुनि ने कहीं। इस अवसर पर साप्ताहिक ज्ञान यज्ञ के तहत आरक्षण कितना, समस्या और समाधान विषय पर चर्चा की गई।
कार्यक्रम का शुभारंभ विश्व शांति के लिए हवन यज्ञ में आहुति डालकर किया गया। इस अवसर पर बजरंग मुनि ने कहा कि आरक्षण समानता को असमान बना देता है, आरक्षण हमेशा घातक होता है। स्वतंत्रता पूर्व का जातीय अथवा परिवार व्यवस्था में पुरुषों को प्राप्त सामाजिक आरक्षण भी घातक था। स्वतंत्रता के बाद का संवैधानिक आरक्षण भी घातक है। जातीय आरक्षण, महिला आरक्षण, धार्मिक आरक्षण अथवा गरीबी आरक्षण के दुष्परिणाम स्वाभाविक होते हैं। भारत इन दुष्परिणामों की चपेट में है। इस मौके पर आचार्य पंकज ने कहा कि कुछ लोग जातीय आरक्षण का विरोध कर रहे हैं। कुछ लोग हिन्दू राष्ट्र की मांग करते हैं तो कुछ लोग मुसलमानों को आरक्षण देना चाहते हैं, तो कुछ महिला सशक्तिकरण का नारा लगाते हैं। स्पष्ट दिखता है कि किसी भी प्रकार का आरक्षण हमेशा घातक होता है। इस अवसर पर डॉ. राजे नेगी, उत्तम असवाल, डॉ. संतोष मुनि, दीपकृष्ण कुकरेती, शिवानंद जोशी, राजेंद्र चौहान, पीडी डिमरी, वीके पोखरियाल, सरोज डिमरी, ऊषा डोभाल, शक्ति सिंह राणा, सचिन तिवारी, डीपी रतूड़ी, रामकृष्ण पोखरियाल, कमल सिंह राणा आदि मौजूद रहे।