श्रीनगर। गढ़वाल विवि में उत्तराखंड के एयरोसोल (सूक्ष्म धूल के कण), वायु गुणवत्ता और जलवायु परिवर्तन पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ हो गया है। तीन दिनों तक चलने वाले इस कार्यक्रम में देश-विदेश के लगभग 250 ख्याति प्राप्त वैज्ञानिक, विषय विशेषज्ञ, तकनीकी विशेषज्ञ और शोध छात्र हिमालय के परिप्रेक्ष्य में वायु गुणवत्ता और जलवायु परिवर्तन पर चिंतन करेंगे।
गढ़वाल विवि के चौरास स्थित लोक संस्कृति प्रेक्षागृह में रविवार को भौतिकी विभाग की ओर से अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी शुरू हुई। एनपीएल (राष्ट्रीय भौतिकी प्रयोगशाला) दिल्ली के निदेशक डीके असवाल ने कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए कहा कि पर्यावरण जटिल विषय है। धरती पर मानवीय गतिविधि और सूरज की रोशनी पर्यावरण को प्रभावित करती है। हर जगह पर एक जैसे मानक लागू नहीं किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि बादल फटना जैसे घटनाएं प्राकृतिक हैं। लेकिन इन घटनाओं से होने वाले नुकसान से बचाव के लिए नीतियां बननी चाहिए। विशिष्ट अतिथि भारतीय मौसम विज्ञान के सहायक महानिदेशक डा. एसडी अत्री ने कहा कि विश्व में सबसे अधिक दो चीजों पर चिंता जताई गई है। पहला ग्लोबल वार्मिंग और दूसरा आतंकवाद। भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान के उप निदेशक डा. सुरेश तिवाड़ी ने पर्यावरणीय स्वास्थ्य को मजबूत करने के लिए वैश्विक समुदाय को एकजुट करने पर जोर दिया। जबकि गढ़वाल विवि की कुलपति प्रो. अन्नपूर्णा नौटियाल ने उत्तराखंड में वायु प्रदूषण पर चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि भौतिकी विभाग में वायु की गुणवत्ता मापने के लिए आधुनिक यंत्र स्थापित किए जा रहे हैं। इस अवसर पर विवि के भौतिकी विभागाध्यक्ष प्रो. पीडी सेमल्टी, बिड़ला परिसर विभागाध्यक्ष प्रो. टीसी उपाध्याय, कार्यक्रम संयोजक प्रो. एससी भट्ट और आयोजन सचिव डा. आलोक सागर गौतम आदि मौजूद थे।