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गढ़वाल विवि के प्रशासनिक भवन में हुई मारपीट की घटना के लिए डीएवी जिम्मेदार: कुलपति

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श्रीनगर। परीक्षा परिणाम घोषित नहीं होने से हर जगह छात्रों का गुस्सा चरम पर है। एक ओर जहां छात्रों ने परीक्षा परिणाम जारी नहीं होने पर विवि को जिम्मेदार बताया है वहीं, गढ़वाल विवि कुलपति ने परिणाम जारी करने में हो रही देरी पर डीएवी कालेज देहरादून को दोषी ठहराया। इसके अलावा उन्होंने देहरादून के अन्य तीन कालेज डीबीएस, एमकेपीजी व एसजीआरआर की लापरवाही को भी परिणामों में देरी का कारण बताया।
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बृहस्पतिवार को गढ़वाल विवि कुलपित प्रो. अन्नपूर्णा नौटियाल ने यहां आयोजित पत्रकारवार्ता में कहा कि डीएवी सहित देहरादून के अन्य तीन महाविद्यालयों की लापरवाही और मनमानी गढ़वाल विवि के लिए समस्या पैदा करते हैं। उन्होंने कहा कि 28 सितंबर को विवि के प्रशासनिक भवन में हुई घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। डीएवी के छात्र परीक्षा परिणाम जारी करने में हो रही देरी के संबंध में वार्ता के लिए आए थे, लेकिन वार्ता करने के बजाय वह उग्र हो गए। कुलपति ने स्वीकारा की कुछ स्तर पर विवि से भी गलतियां हुई होंगी, लेकिन परीक्षा परिणाम घोषणा करने में देरी के लिए डीएवी सहित डीबीएस, एमकेपीजी व एसजीआरआर जिम्मेदार हैं। कुलपति ने बताया कि शीतकालीन अवकाश के दौरान परीक्षा आयोजित होने पर डीएवी के शिक्षकों ने परीक्षा का बहिष्कार कर दिया था, जिससे गढ़वाल विवि की परीक्षा व्यवस्था पूरी तरह पटरी से उतर गई। जबकि जोशीमठ जैसे ठंडे क्षेत्र के महाविद्यालय के शिक्षकों ने परीक्षा आयोजित कराई थी। वहीं डीबीएस, एमकेपीजी व एसजीआरआर से भी परीक्षा संबंधित कोई न कोई दिक्कत सामने आती है और फिर परीक्षा परिणाम समय पर जारी नहीं होते। प्रेसवार्ता में कुलसचिव डा. एके झा, परीक्षा नियंत्रक प्रो. आरसी भट्ट, मुख्य नियंता प्रो. अरुण बहुगुणा, डीएसडब्ल्यू प्रो. पीएस राणा, पीआरओ आशुतोष बहुगुणा आदि मौजूद थे।
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केंद्रीय विवि और राज्य में नहीं बन पा रहा सामंजस्य : कुलपति
श्रीनगर। गढ़वाल विवि की कुलपति प्रो. अन्नपूर्णा नौटियाल ने राज्य सरकार व केंद्रीय विवि में सामंजस्य न होने की बात कही। प्रो. नौटियाल ने कहा कि केंद्रीय विवि प्रशासन को विश्वास में लिए बिना राज्य सरकार ने 52 राजकीय महाविद्यालयों को श्रीदेव सुमन विवि से संबद्ध करा दिया है। कहा कि असंबद्ध हुए 52 राजकीय महाविद्यालयों पर गढ़वाल विवि स्पष्ट नहीं है। उन्होंने बताया कि छात्र महासंघ चुनाव के दौरान शासन से महाविद्यालयों की सूची मांगे जाने पर उन्हें इसका पता चला। प्रो. नौटियाल ने नाराजगी जताते हुए कहा कि जब राजकीय महाविद्यालयों को असंबद्ध कर दिया गया था तो दून के चार महाविद्यालयों भी अलग किया जाना चाहिए।
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