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परमात्मा की नहीं कोई उपमा

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परमात्मा की नहीं कोई उपमा
- संगीताचार्य पंडित दिनेश दत्त आर्य ने भजनों की सुरीली प्रस्तुति देकर संगत को किया निहाल
अमर उजाला ब्यूरो
विकासनगर। आर्य समाज मंदिर में चल रहे 124वें वार्षिक महोत्सव में मंगलवार को वेद प्रवचन कर्ता पं. वीरेंद्र शास्त्री ने उपनिषदों की महिमा का बखान करते हुए कहा कि परमात्मा की कोई उपमा नहीं है। परमात्मा आकाश की भांति व्याप्त है। सब कुछ परमात्मा से उत्पन्न हुआ है और अंत में उसी में समा जाएगा।
दिल्ली से पधारे भजनोपदेशक संगीताचार्य पंडित दिनेश दत्त आर्य ने भजनों की सुरीली प्रस्तुति देकर संगत को निहाल कर दिया। ‘उनके प्रभु जी मुझे वरदान दो, मैं कभी ना तुमसे जुदा रहूं, जैसे घी, दूघ मिल रहे हैं वैसे मैं भी तुमसे मिला रहूं, बाजी हार के जीवन की, मैं जीत सका तृष्णा मन की, ये भावना बना ले मत करे बुरा किसी का’ भजन गाकर संगत को निहाल कर दिया।
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इस मौके पर पं. चंदन शास्त्री, रामपाल रोहिला, हरिकिशोर महेंद्र, सुरेंद्र सैनी, प्रेमसागर वर्मा, प्रवीण गर्ग, पं. मूलचंद, धनंजय, नरेंद्र वर्मा, राजेश गोयल, स्वाती गुप्ता, डॉ. नरदेव, संजय सैनी, जीतू शर्मा, ज्ञानेंद्र रोहिला, सुमेध वर्मा, गणपत अरोड़ा, सोनिकज वालिया, नंदिनी, अनिता, पूनम, अंकिता, आकृति, दिव्या, रेखा, विजय, मिथलेश, सावित्री, नीलम, विमला, रश्मि, खीमा, कल्पना, अश्ल्का आदि मौजूद रहे।
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