जोशीमठ/गोपेश्वर। भारतीय पर्वतारोहियों का नौ सदस्यीय दल 5760 मीटर की ऊंचाई पर स्थित गुप्तखाल ट्रैक को फतह करने के लिए रविवार को जोशीमठ से रवाना हुआ। वर्ष 2010 के बाद यह पहला दल है, जो रहस्यमयी गुप्तखाल पास की ट्रेकिंग पर निकला है। एडवेंचर ट्रेकिंग टूर ऑपरेटर एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने गांधी मैदान से दल को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। वहीं सतोपंथ-स्वर्गारोहिणी ट्रैकिंग को गया दल सकुशल बदरीनाथ धाम लौट आया है।
पर्वतारोही दल के साथ 17 पोर्टर भी हैं। पहले दिन दल रात्रि विश्राम के लिए भ्यूंडार गांव के पास रुका। वर्ष 2010 में उत्तरकाशी के युवा माउंटेन गाइड विनोद पंवार के नेतृत्व में भारतीय दल ने गुप्तखाल ट्रेक को फतह किया था। गाइड विनोद ने बताया कि ट्रेक की खास बात यह है कि यह दो दर्रो और बेहद खतरनाक ग्लेशियर प्वाइंट से होकर गुजरता है। यह ट्रेक करीब सौ किमी का है। हाई एल्टीट्यूट दर्रों को पार कर माणापास के समीप यह ट्रेक पूर्ण होता है। ट्रेक को पार करने में करीब 11 दिन का समय लगता है। एडवेंचर एसोसिएशन के अध्यक्ष विवेक पंवार का कहना है कि चमोली जिले में कालिंदीखाल के बाद गुप्तखाल ट्रेक सर्वाधिक रोमांचक भरा है। उधर, सतोपंथ-स्वर्गारोहिणी की ट्रैकिंग पर गए दल में बंगलूरू के 87 वर्षीय एचआर जोईस ने भी शामिल थे। माउंटेन ट्रैक्स की ओर से 12 सितंबर को दल स्वर्गारोहिणी की ट्रैकिंग पर गया। दल में मालदीव के ट्रैकर रवि और चित्रा भी शामिल थे। 16 सितंबर को देर शाम दल सकुशल बदरीनाथ धाम लौट आया। माउंटेन ट्रैक्स के संस्थापक राहुल मेहता का कहना है कि प्रतिवर्ष ट्रैकर स्वर्गारोहिणी की ट्रैकिंग के लिए पहुंचते हैं।