श्रीनगर। हिमालय बचाना है तो पर्वतीय क्षेत्रों में कुटीर उद्योगों की स्थापना कर यहां से हो रहे पलायन पर रोक लगानी जरूरी है। जब तक हम गांव, गुठियार, गंगा, गौ, पर्यावरण को संरक्षित नहीं करेंगे हिमालय बचाने की परिकल्पना नहीं की जा सकती है। पत्रकारों से वार्ता के दौरान पर्यावरण विद् जगत सिंह चौधरी जंगली यह बातें कही।
बुधवार को पत्रकार वार्ता में वन विभाग के ब्रांड अंबेसडर पर्यावरण विद् जगत सिंह चौधरी ‘जंगली’ ने हिमालय बचाने के लिए सरकारी एवं गैर सरकारी स्तर पर किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। जंगली ने हिमालयी क्षेत्र के गांवों से हो रहे पलायन को भी हिमालय की सेहत के लिए खतरा बताया। कहा कि हिमालय की सुरक्षा के लिए यहां के जल, जंगल, जमीन व जन की महत्वपूर्ण भूमिका है। कहा कि जंगलों में लगने वाली आग पर नियंत्रण होना चाहिए, जिसके लिए गांव के बेरोजगार युवाओं एवं युवतियों का सहयोग लिया जाना जरूरी है। इसके लिए राज्य ही नहीं बल्कि केंद्र सरकार को भी सहयोग करना चाहिए। जंगली ने कहा कि हिमालय हमारी सभ्यता एवं संस्कृति है, जिसका संरक्षण सबको मिलकर करना होगा। जंगली ने प्रदेश के वन प्रमुख के उस आदेश की भी सराहना की, जिसमें उन्होंने प्रत्येक जनपद में मिश्रित वन लगाए जाने को कहा है। इस मौके पर पर्वतीय विकास शोध केंद्र के नोडल अधिकारी डा. अरविंद दरमोडा व मानव शास्त्री प्रो. विद्या सिंह चौहान आदि मौजूद थे।