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अंगदान के प्रति लोगों में जागरुकता का अभाव : डॉ. रवि कांत

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ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश । एम्स ऋषिकेश में सर्जरी व यूरोलॉजी विभाग के साथ पीजीआई चंडीगढ़ के रोटो की ओर से अंगदान और अंग प्रत्यारोपण के प्रति जागरुकता को लेकर कार्यशाला का आयोजन किया गया। एम्स में आयोजित कार्यशाला का निदेशक प्रोफेसर डॉ. रवि कांत ने शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि भारत में 10 लाख से ज्यादा लोग शरीर के अंगों के फेल हो जाने पर मौत के मुंह में समा जाते हैं। जबकि आखिरी समय में भी उन्हें अंगदान से बचाया जा सकता है। हालांकि देश में अंगदान के प्रति अभी भी आम लोगों में जागरूकता का अभाव है। कहा कि देश में मृतकों के अंगदान के लिए कानूनी तौर पर मजबूत व्यवस्था करनी होगी। कार्यशाला का उद्देश्य भी आम लोगों में अंगदान के प्रति जागरुकता विकसित करना ही है।
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कार्यशाला में पीजीआई चंडीगढ़ के चिकित्सा अधीक्षक प्रो. अनिल गुप्ता ने कहा कि अंगदान के प्रति जागरुकता के साथ आईसीयू व इमरजेंसी स्टाफ को प्रशिक्षित करना होगा। साथ ही अस्पतालों को प्रत्यारोपण केंद्र के रूप में पंजीकृत करना व अस्पताल में आए ब्रेन डेड केस की बेहतर रिपोर्टिंग करना भी सीखना होगा। एम्स नर्सिंग कॉलेज के डीन प्रो. सुरेश शर्मा ने प्रत्यारोपण की प्रक्रिया में नर्सों को कोआर्डिनेटर की भूमिका निभाने की बात कही। पीजीआई के प्रत्यारोपण सर्जरी विभागाध्यक्ष प्रो. आशीष शर्मा ने बताया कि 1996 से अब तक पीजीआई में 319 किडनी ट्रांसप्लांट किए जा चुके हैं, इसमें से 80 प्रत्यारोपण सिर्फ पिछले साल ही किए गए। साथ ही पैंक्रियास और किडनी के प्रत्यारोपण के 13 केस करने का रिकॉर्ड भी पीजीआई के नाम पर हुआ है।
एम्स ऋषिकेश के यूरोलॉजी विभाग के डॉ. अकुर मित्तल ने भारत तथा अन्य यूरोपीय देशों के समाजों में अंगदान की स्थिति पर प्रकाश डाला। एम्स के एनेस्थीसिया विभाग के एडिशनल प्रोफेसर डॉ. बीके त्रिपाठी ने ब्रेन डेड की स्थिति की जानकारी दी। इस दौरान लीवर प्रत्यारोपण से जुड़ी एक डॉक्यूमेंट्री भी दिखाई गई। कार्यशाला में 130 विशेषज्ञों ने अंगदान की शपथ ली। इस अवसर पर आयोजक सचिव डा. फरहान हुडा, डा. अंकुर मित्तल, सर्जरी विभाग की प्रो. बीना रवि, प्रो. सोम बसु आदि मौजूद थे।
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