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शहर की सड़कों पर 1,772 अतिक्रमण

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ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश। प्रशासन, नगर निगम, हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण (एचआरडीए) और सिंचाई विभाग की अनदेखी के कारण ऋषिकेश की सड़कों, नदी किनारों और वन भूमि पर 1772 अतिक्रमण हो गए। उक्त विभागों ने क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की जगह नोटिस जारी कर खानापूर्ति कर दी। अब हाईकोर्ट के आदेेश के बाद प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं। नगर क्षेत्र में नेशनल हाईवे से आंतरिक मार्गों के किनारों पर डेढ़ हजार से अतिक्रमण खुद सरकारी महकमों ने चिह्नित किए हैं, जिनका हवाला हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका में दिया गया है। लिहाजा, कोर्ट के आदेश के बाद अब सिर्फ चिह्नित ही नहीं, बल्कि सरकारी भूमि पर किए गए अन्य अतिक्रमण को भी प्रशासन हटा सकता है।
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विभिन्न विभागों की ओर से आई रिपोर्ट के अनुसार हरिद्वार-ऋषिकेश नेशनल हाईवे, हरिद्वार बाईपास मार्ग और शहर के आंतरिक मार्गों पर 1,772 अतिक्रमण संबंधित विभागों की ओर से चिह्नित किए हैं। इनमें अधिकांश अतिक्रमण स्थायी प्रकृति के हैं। इसके अलावा भी कई स्थानों पर हाईवे और अन्य मार्गों पर लोग अतिक्रमण कर कारोबार चला रहे हैं। सड़कों के किनारे फुटपाथ पर कब्जा करने वाले लोगों के खिलाफ अभी तक किसी भी विभाग ने कार्रवाई की जहमत नहीं उठाई है। ऐसे में हाईकोर्ट द्वारा जनहित याचिका का संज्ञान लेकर उस पर आदेश जारी करने से सड़कों से अतिक्रमण का हटना लगभग तय हो गया है। फिलहाल विभागीय अधिकारी कोर्ट का आदेश नहीं मिलने की दलील दे रहे हैं। हालांकि, उन्होंने आदेश की कॉपी मिलने पर कार्रवाई की बात भी कही है।
अतिक्रमण हटने से सुधरेगी यातायात व्यवस्था
शहर की सड़कों की घेरबाड़ कर उन्हें संकरा करने वालों पर कार्रवाई होने से लोगों को अक्सर पेश आने वाली जाम की समस्या से भी निजात मिलने की उम्मीद बंध गई है। वहीं, सड़कों के किनारे फुटपाथ आदि पर कब्जा कर कारोबार चलाने वाले लोगों में आदेश के बाद हड़कंप की स्थिति है। उधर, अतिक्रमण से परेशान शहर के नागरिकों को भी अब हाईकोर्ट के आदेश पर अमल का इंतजार है।
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