गोपेश्वर। चुफलागाड नदी पर बने झूला पुल के क्षतिग्रस्त एप्रोच मार्ग पर ग्रामीणों ने स्वयं बल्लियां बिछाकर आवाजाही शुरू करा दी है। ग्रामीण एक दूसरे का सहारा बनकर पुल पर आ-जा रहे हैं। लोनिवि ने फिलहाल धनाभाव बताते हुए पुल का एप्रोच मार्ग बनाने में असमर्थता जता दी है।
बता दें कि 14 जुलाई को भारी बारिश के दौरान चुफलागाड नदी का जल स्तर बढ़ने से झूला पुल का एप्रोच मार्ग क्षतिग्रस्त हो गया था। यह पुल ग्राम पंचायत भेंटी, कठूड़ा, लांखी और बांजबगड़ गांव के ग्रामीणों की पैदल आवाजाही का एकमात्र साधन था। ग्रामीण पुल के क्षतिग्रस्त भाग पर रस्सी के सहारे सीढ़ी चढ़कर नदी पार कर रहे थे। लोक निर्माण विभाग कर्णप्रयाग ने बजट का अभाव बताते हुए फिलहाल एप्रोच मार्ग के निर्माण से हाथ खड़े कर दिए थे। बुधवार को क्षेत्रीय जनता ने जिला प्रशासन का मुंह ताकने के बजाय स्वयं आवाजाही के लिए वैकल्पिक व्यवस्था का निर्णय लिया। सुबह सात बजे से ग्रामीणों ने पुल के क्षतिग्रस्त भाग में बल्लियां बिछाने और पुश्ता निर्माण का कार्य शुरू किया। दोपहर तीन बजे तक बल्लियों के ऊपर से आवाजाही शुरू कराई गई।
पूर्व प्रधान बांजबगड़ अर्जुन सिंह रावत और वन पंचायत सरपंच रणजीत सिंह का कहना है कि पुल का एप्रोच मार्ग क्षतिग्रस्त होने से ग्रामीण रोजमर्रा के कार्य के लिए भी जान जोखिम में डालकर जा रहे थे। जीआईसी बांजबगड़ में पढ़ने जा रहे छात्र-छात्राओं को भी आवाजाही में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। अब फिलहाल बल्लियों के सहारे आवाजाही शुरू करा दी गई है। ग्रामीण पुल पर एक दूसरे का सहारा बनकर आगे बढ़ रहे हैं।