ब्यूरो/अमर उजाला/साहिया।
बिरमऊ गांव में रात्रि प्रवास के बाद चालदा महासू देवता की पालकी रविवार को रंगेऊ गांव पहुंच गई। यहां से प्रस्थान कर आज (सोमवार) करीब 100 साल बाद देव पालकी कोटा तपलाड़ गांव में प्रवेश करेगी। देव पालकी के आगमन को लेकर लोगों में खासा उत्साह बना हुआ है।
रविवार को दिनभर गांव में देव पालकी के आगमन की तैयारियां चलती रही। देव पालकी के स्वागत को यहां 20-30 हजार लोगों के पहुंचने का अनुमान है। इससे पूर्व रविवार को भारतीय तटरक्षक बल के डीजी राजेंद्र तोमर ने भी पालकी को कंधा देकर बिरमऊ गांव से विदा किया। इसके बाद देव पालकी ने बिरमोऊ कांडी, पुरोड़ी, इंद्रोली, रावना पाटी, जाखाधार, मयरावना, बुरास्वा, जोगियो, क्वांसी होते हुए रंगेऊ गांव में प्रवेश किया। जगह-जगह लोगों ने फूल और चावलों की बारिश के साथ देव पालकी का स्वागत किया। पालकी के साथ बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। ढोल-दमाऊ की थाप पर देव पालकी की अगुवानी पताका (सफेद निशान) ने की। जिसके पीछे पद चिह्न, दीप लोटा, छड़ी, पाथा, डोरिया चल रहे थे। बारिश भी लोगों के उत्साह को कम नहीं कर सकी। इस मौके पर सदर स्याणा दिनेश सिंह तोमर, मुकेश तोमर, अर्जुन दत्त जोशी, सूरत सिंह रावत, दिनेश चौहान, दयाराम जोशी, टीकम सिंह, भीम दत्त वर्मा आदि मौजूद रहे।