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नीलकंठ में प्यासे भटक रहे हैं हजारों यात्री

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ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश।
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उत्तराखंड में सर्वाधिक तीर्थयात्रियों की आमद वाले प्राचीन नीलकंठ महादेव मंदिर क्षेत्र और स्वर्गाश्रम से नीलकंठ पैदल यात्रा मार्ग पर जलापूर्ति की बहाली नहीं हो पाई है। जिसके कारण इन दिनों पौराणिक शिवालय के दर्शन को उमड़ रहे हजारों श्रद्धालुओं को प्यासा भटकना पड़ रहा है। इस मामले में जल संस्थान कोटद्वार डिवीजन लापरवाह बना हुआ है, जबकि यमकेश्वर तहसील प्रशासन विभाग को मेला क्षेत्र में जलापूर्ति व्यवस्था की बहाली के निर्देश देने की बजाए इससे जुड़ी रिपोर्ट के इंतजार में बैठा है। मंदिर समिति के सचिव धन सिंह राणा ने बताया कि अक्सर भीड़भाड़ के समय स्टैंड पोस्टों पर जलापूर्ति नहीं की जाती है। इन दिनों मंदिर में दर्शन के लिए हर रोज लगभग 35 हजार शिव भक्त पहुंच रहे हैं, मगर स्टैंड पोस्टों पर जलापूर्ति नहीं होने से उन्हें प्यासा भटकना पड़ रहा है।
98 लाख की योजना फिर भी भटक रहे यात्री
नीलकंठ क्षेत्र में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए महाकुंभ मेला निधि 2010 के तहत 98 लाख की लागत से पृथक से पेयजल योजना बनी हुई है। जल संस्थान अक्सर मेला क्षेत्र में लगे स्टैंड पोस्टों पर भीड़भाड़ के समय जलापूर्ति सुचारु नहीं कराता। खासकर स्वर्गाश्रम से नीलकंठ पैदल मार्ग पर श्रावण मास की कांवड़ यात्रा व महाशिवरात्रि मेले के दौरान गिने चुने दिनों में ही जलापूर्ति हो पाती है। बाकी वर्ष भर स्टैंड पोस्ट सूखे रहते हैं, जबकि इस क्षेत्र में बारों माह तीर्थयात्री प्राचीन नीलकंठ महादेव मंदिर के दर्शन के लिए उमड़ते हैं।
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तहसीलदार से मांगी रिपोर्ट
उक्त मामला संज्ञान में है। क्षेत्र में जलापूर्ति व पंपिंग हावर की जानकारी की रिपोर्ट तहसीलदार से मांगी गई है। एक-दो दिन में रिपोर्ट मिलने पर इस बाबत कार्रवाई की जाएगी।
कमलेश मेहता, उपजिलाधिकारी।
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