ब्यूरो/अमर उजाला/नागथात।
बरसात में बिजऊ-कुईथा-खतार मोटर मार्ग से जुड़े आधा दर्जन गांवों के लोगों की आवाजाही मुश्किलों भरी हो जाती है। डामरीकरण न होने से बरसात में यह सड़क कीचड़ में तब्दील हो जाती है। जगह-जगह मलबा आने से वाहनों की रफ्तार पर ब्रेक लग जाता है। जिसके चलते लोगों को आवाजाही में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
वर्ष 2008 में आठ किमी लंबी इस सड़क की कटिंग हुई। तब से विभाग ने सड़क की सुध नहीं ली। सड़क से बिजऊ, सुंदराया, कौराड़ा, सैमाया, कोफ्टी और भुगतार गांवों की आबादी हुई जुड़ी है। डामरीकरण न होने से लोगों का सफर मुश्किल बना हुआ है। स्थानीय निवासी गजेंद्र सिंह तोमर, मोहन सिंह, चतर सिंह तोमर, भोपाल सिंह का कहना है हल्की सी बारिश में सड़क बंद हो जाती है। नानबाग और पोखर खड्ड में काजवे का निर्माण भी नहीं किया गया है। बारिश का पानी सड़क पर बहने से लगातार कटाव होता रहता है। कई जगहों पर सुरक्षा दीवार भी नहीं बनाई गई हैं। उधर, लोनिवि के ईई डीपी सिंह ने बताया कि सड़क के डामरीकरण का प्रस्ताव का शासन स्तर पर लंबित है। बजट मिलने पर ही डामरीकरण किया जाएगा।