श्रीनगर। गढ़वाल के केंद्र और चार धाम यात्रा मार्ग पर स्थित राजकीय मेडिकल कालेज की व्यवस्थाएं पटरी पर नहीं आ पा रही हैं। रविवार को देवप्रयाग बस दुर्घटना होने पर एक बार फिर इस उच्च चिकित्सीय संस्थान की अव्यवस्थाएं खुलकर सामने आईं। बड़ी दुर्घटना की सूचना होने के बाद अस्पताल में अलर्ट नहीं था। घायलों को एंबुलेंस से इमरजेंसी वार्ड में लाने के लिए मौके पर स्टाफ नहीं था। जब मरीज वार्ड में लाए गए, तो सीनियर डॉक्टर मौजूद नहीं थे। हालांकि अस्पताल के प्रभारी चिकित्सा अधीक्षक ब्लड बैंक के इंचार्ज डा. सतीश और फीजियोलॉजी के एचओडी डा. विमल गुसांई ने जूनियर व प्रशिक्षु डॉक्टरों के साथ मरीजों की मरहम पट्टी की।
मेडिकल कालेज श्रीनगर में फैकल्टी और संसाधनों की कमी हमेशा बनी रही है, लेकिन लचर व्यवस्थाएं स्थिति को और खराब कर देती हैं। रविवार पूर्वाह्न लगभग सवा एक बजे जब देवप्रयाग बस दुर्घटना के घायल मेडिकल कालेज पहुंचे, तो उनको वार्ड तक लाने के लिए स्टाफ नहीं मिला और न ही स्ट्रेचर। जब कोई नहीं मिला, तो समाचार कवरेज करने गए मीडियाकर्मी स्ट्रेचर लाए और सुरक्षा गार्ड व अन्य लोगों के साथ घायलों को वार्ड में ले गए।
दुर्घटना की सूचना एक घंटे पूर्व मिलने के बावजूद यहां सीनियर डाक्टर नदारद थे। जूनियर व प्रशिक्षु डाक्टरों ने ही स्टाफ के साथ घायलों का उपचार शुरू किया, जबकि किसी बड़ी दुर्घटना होने के बाद विशेषज्ञ चिकित्सकों को इमरजेंसी वार्ड में बुला लिया जाता है।
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-घायलों के आने के बाद उपचार किया गया। दो वार्ड ब्वाय ड्यूटी पर हैं। हड्डी रोग विभाग में सिर्फ दो डॉक्टर हैं। एक अवकाश पर चल रहे हैं। सर्जरी विभाग के चिकित्सकों को भी सूचित कर दिया गया है।
-डा. सतीश कुमार, चिकित्सा अधीक्षक, बेस अस्पताल, श्रीनगर