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बदलते दौर में बाल साहित्य के माध्यमों में बदलाव जरूरी

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गैरसैँण। एसबीएमए (श्री भुवनेश्वरी महिला आश्रम) सभागार में आयोजित बाल साहित्य संगोष्ठी में मुख्य अतिथि दिल्ली विवि के प्रो. रवि शर्मा ने कहा कि बदलते दौर में बाल साहित्य के प्रचार के माध्यमों में भी बदलाव जरूरी है।
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तीन दिवसीय संगोष्ठी के समापन पर प्रो. रवि शर्मा ने कहा कि आज पुस्तकों को महत्व बरकरार रखते हुए यूट्यूब, फेसबुक, ट्वीटर सहित तमाम माध्यमों से साहित्यकारों को बाल साहित्य बच्चों को पहुंचाना चाहिए। भुवन नौटियाल ने प्रथम विक्टोरिया क्रॉस विजेता दरवान सिंह नेगी और शताब्दी समारोह के बारे में बताया। समारोह को ज्ञान सिंह, धन सिंह, नवीन डिमरी ,विजय भट्ट, शंभू प्रसाद भट्ट, एसबीएमए के परियोजना प्रबंधक गिरीश डिमरी, पीसी तिवारी, नीरज पंत आदि मौजूद थे।

18 साहित्यकार किए सम्मानित
राजस्थान के साहित्यकार और बाल वाटिका के संपादक डा. भैंरो लाल गर्ग को राष्ट्रबंधु बाल साहित्य सम्मान-2018 से सम्मानित किया गया। राजस्थान के गोविंद शर्मा, रामगोपाल राही, रघुराज सिंह कर्मयोगी, आशा शर्मा, उत्तर प्रदेश के गौरी शंकर वैश्य, डा. रामदुलार पराया, शताब्दी गरिमा, डा. अल्का प्रमोद, गुडविन मसीह, हरियाणा के शमशेर कोसलिया, डा. शील कौशिक, मध्य प्रदेश से राजेंद्र श्रीवास्तव, दिल्ली से शिवचरण सरोहा, उत्तराखंड से महावीर रवांल्टा, डा. कुशुमरानी नैथानी, बीपी शाह, अशोक गुलशन को बाल साहित्य सम्मान दिया गया। हरिसुमन बिष्ट, प्रो. जगत सिंह बिष्ट, लक्ष्मी खन्ना, परमेश्वरी शर्मा, कैलाश डोलिया, नीलम नेगी, डा. मंजू बलोदी को भी सम्मानित किया गया।
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