फब्यूरो/अमर उजाला,ऋषिकेश।
राज्य सरकार को यमकेश्वर प्रखंड की ग्रामसभा ढौसण के ग्रामीणों ने आइना दिखाया है। ग्रामीण खुद के 10 लाख रुपये खर्च कर पेयजल पंपिंग योजना तैयार कर रहे हैं, जिसका लगभग 50 फीसदी कार्य पूरा हो चुका है। योजना के पूरा होने के बाद गांव के 40 परिवारों तक स्वच्छ पेयजल पहुंच सकेगा। उन्हें कई किलोमीटर से सिर पर पानी ढोकर लाने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ेगा।
ब्लॉक की ग्रामसभा ढौसण में 40 परिवार निवास करते हैं। दशकों से ग्रामीण प्राकृतिक जलस्रोतों से कई किलोमीटर की दूरी तय कर सिर पर पानी ढोने को मजबूर हैं। गांव के युवाओं ने पेयजल की समस्या को खत्म करने की ठानी और इसके बाद पेयजल पंपिंग योजना का प्लान तैयार किया। योजना की शुरुआत में गांव के समीप एक लाख और 60 हजार लीटर का पेयजल टैंक बनाया जा रहा है, जिसमें करीब 700 मीटर दूर गदेरे से प्राकृतिक जलस्रोत का पानी लिफ्ट कर टैंक तक पहुंचाया जाएगा। गांव में पेयजल सप्लाई के लिए पानी लाइन भी बिछाई जा रही है।
गौरतलब है कि गांव के 40 परिवार स्थानीय विधायक और सरकार से पेयजल की समस्या से निजात दिलाने को लेकर कई बार गुहार लगा चुके हैं, लेकिन लगातार अनदेखी होने पर ग्रामीणों ने स्वयं ही पेयजल योजना तैयार करने का निर्णय लिया।
गांव के ही इंजीनियर और ठेकेदार
ढौसण गांव में पंपिंग योजना को अंजाम तक पहुंचाने के लिए किसी इंजीनियर या फिर ठेकेदार को हायर नहीं किया गया है, बल्कि इस योजना को तैयार करने वाले ग्रामीण ही इंजीनियर हैं और वही ठेकेदार भी हैं। रोजाना ग्रामीण श्रमदान कर योजना को अंतिम चरण तक पहुंचाने में जुटे हैं। उन्होंने इसके लिए किसी से वित्तीय सहायता नहीं ली है।
ढौसण की सूरत बदलने की खाई कसम
ढौसण के ग्रामीणों ने खुद गांव की सूरत बदलने की योजना बनाई है। इनमें ग्रामीण हरेंद्र पयाल, सुखपाल पयाल, अरविंद पयाल, बबलू पयाल, सुमित पयाल, महेंद्र पयाल, देवेंद्र पयाल, मोहन पयाल, विनोद पयाल, प्रमोद पयाल, सत्यपाल पयाल, चंद्रपाल पयाल, खेम पयाल, जयपाल पयाल, अमन पयाल, शिबू पयाल, बिजेंद्र पयाल आदि शामिल हैं।