ब्यूरो/अमर उजाला,मुनिकीरेती ।
परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती मुनि ने भारत लोक शिक्षा परिषद की ओर से विद्यालय विहीन आदिवासी क्षेत्रों व गांवों में संचालित किए जा रहे एकल विद्यालय कांसेप्ट को शिक्षित समाज के निर्माण में मील का पत्थर साबित होने वाली मुहिम बताई। उन्होंने बताया कि परमार्थ निकेतन भी परिषद के साथ बच्चों को संस्कारवान शिक्षा देने के लिए कार्य करेगा। रविवार को परमार्थ निकेतन आश्रम में आयोजित पत्रकारवार्ता में स्वामी चिदानंद सरस्वती मुनि ने बताया कि भारत लोक शिक्षा परिषद मुख्य रूप से सुदूर गांवों व आदिवासी क्षेत्रों के बच्चों को एकल विद्यालय के माध्यम से संस्कार व शिक्षा देने का कार्य कर रही है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा की ज्योति ही जीवन के अंधकार को दूर कर सकती है। बताया गया कि एकल विद्यालय कांसेप्ट के तहत देश के सुदूर क्षेत्रों में 67 हजार विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं, जिनमें करीब 18 लाख बच्चों को बेसिक शिक्षा दी जा रही है। बताया गया कि संस्कार व शिक्षा के साथ ही सुदूर ग्रामीण इलाकों में बच्चों को कंप्यूटर सचल वाहनों की व्यवस्था की गई है। प्रत्येक वाहन में 12 लैप्टॉप व ट्रेनर के माध्यम से 24 बच्चों को प्रशिक्षित किया जाता है।
संस्था उत्तराखंड में इस कांसेप्ट पर 1350 केंद्र संचालित कर रही है। राज्य में चमोली, खटीमा, अल्मोड़ा और उधमसिंह नगर के सुदूरवर्ती इलाकों में कार्य कर रही है। इस मौके पर स्वामी हंसदेवाचार्य ने कहा कि एकल विद्यालयों में देश की रक्षा करने वाली पीढ़ी को तैयार किया रहा है, जिसमें उन्हें मानवता आधारित शिक्षा दी जाती है। एकल ग्रामोत्थान विद्यालय के माध्यम से बच्चों को व्यावसायिक प्रशिक्षण भी दिया जाता है, जिसके तहत तीन जिलों में एक विद्यालय की स्थापना की गई है। बताया कि एकल विद्यालय के माध्यम से संस्था अशिक्षा को समाप्त करने के उद्देश्य से कार्य कर रही है। इस अवसर पर स्वामी ज्योर्तिमयानंद, महामंडलेश्वर भक्त हरि, स्वामी हरिचेतनानंद, लोकेश शर्मा, नंदकिशोर अग्रवाल, अखिल गुप्ता, हरिओम शर्मा, राजेश दीक्षित आदि मौजूद थे।