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पर्यटन विभाग में स्वीडन के प्रोफेसर वैसलर ने किया मार्गदर्शन

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श्रीनगर। उपसला विवि स्वीडन के इंडोलॉजी के प्रोफेसर वैसलर ने एचएनबी केंद्रीय गढ़वाल विवि के पर्यटन विभाग में भाषा, संस्कृति, संगीत और कला की जानकारियां दी। ढोल सागर पर अध्ययन कर रहे प्रो. वैसलर ने छात्र-छात्राओं को बताया कि उन्हें गढ़वाल की संस्कृति से लगाव है।
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मंगलवार को पर्यटन विभाग में आयोजित कार्यशाला में प्रो. वैसलर ने कहा कि उत्तराखंड का गीत-संगीत और ढोल वादन एक ही समाज के हाथों में है। ऐसा नहीं होना चाहिए, सभी को इस कला का ज्ञान होना चाहिए। ढोल सागर बहुत समृद्ध कला है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि हिंदुस्तानी संगीत पर पूर्व में कुछ ही लोगों का अधिकार था, लेकिन सितारवादक रविशंकर के संगीत के क्षेत्र में आने से काफी कुछ बदल गया। प्रो.वैसलर ने कहा कि उत्तराखंड की पहचान बनाने के लिए ढोल सागर पर और अधिक अध्ययन कर इसको आगे बढ़ाना चाहिए। शिक्षा पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि सरकार को प्राइमरी स्तर की शिक्षा में सुधार के लिए बजट और संसाधन बढ़ाने होंगे। विवि में मौलिक शोध पर जोर दिया जाना चाहिए। ताकि दुनिया को नई-नई जानकारियां मिल सके। पर्यटन विभागाध्यक्ष प्रो. एससी बागड़ी ने उनका आभार जताते पुन: मार्गदर्शन करने का अनुरोध किया। इस अवसर पर प्रो. एसके गुप्ता, डा. आरके डोडी, डा. सर्वेश उनियाल और डा. विजय भट्ट आदि उपस्थित थे।
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