ब्यूरो/अमर उजाला/त्यूनी।
जौनसार बावर की ऊंची चोटियों पर मौसम की बदली करवट के बीच हुई ओलावृष्टि से फसलों को काफी नुकसान पहुंचा है। करीब 15 मिनट तक हुई ओलावृष्टि से खेतों और सड़कों पर ओलों की सफेद चादर बिछ गई। शीतोष्ण फलों को बड़े पैमाने पर नुकसान की आशंका है।
मंगलवार दोपहर एक बजे बाद क्षेत्र के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में आसमान में काले बादल छा गए। इसके बाद तेजी आंधी-तूफान के बीच ओलावृष्टि का दौर शुरू हो गया। इससे मेंद्रथ, नीनूस, बागी, कूणा, ओबरासेर, चौसाल, डांगूठा, रड़ू, मुंधोल, रायगी, डेरसा, प्यूनल, बृनाड़ समेत कई इलाकों में ओलावृष्टि शुरू हो गई। कुछ ही देर में खेतों से लेकर सड़क तक ओलावृष्टि की सफेद चादर से ढक गई। इससे मटर, गेहूं, जौ, टमाटर, मिर्च, बैंगन, गोभी समेत सेब, पुलम, खुमानी, आडू की फसल को बड़े पैमाने पर नुकसान की आशंका है।
स्थानीय काश्तकार वीरेंद्र शर्मा, कल्याण सिंह राणा, एलके जोशी, पंकज आदि का कहना है कि ओलावृष्टि के चलते सेब के पेड़ पर लगे फल और पत्ते पूरी तरह से झड़ गए। खेतों में खड़ी फसल भी पूरी तरह से लेट गई है। पहले ही सर्दियों में बहुत कम बारिश हुई वहीं अब रही सही कसर ओलावृष्टि ने पूरी कर दी है। तहसीलदार स्वराज सिंह तोमर ने बताया कि मामले में राजस्व उपनिरीक्षक को क्षति पूर्ति का आंकलन कर जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
चकराता में दो घंटे हुई बारिश
चकराता। ऊंची चोटियों पर मौसम की बदली करवट के बीच चकराता समेत आसपास के इलाकों में करीब दो घंटे तक झमाझम बारिश हुई। इससे ठंड में इजाफा हो गया है। लोगों के गर्म कपड़े बाहर निकल आए। दोपहर तक आसमान में चटक धूप निकली हुई थी। लेकिन एक बजे बाद मौसम ने करवट बदलना शुरू कर दिया। दो बजे क्षेत्र में बारिश का दौर शुरू हो गया जो चार बजे तक जारी रहा। बारिश के चलते ठंड में इजाफा हो गया। लोगों के गर्म कपड़े बाहर निकल आए। 18 डिग्री के आसपास झूल रहा पारा लुढ़क कर 13 डिग्री पर जा पहुंचा।