श्रीनगर। बाल उलार नाट्य महोत्सव के अंतिम दिन ‘हवालात’ नाटक का मंचन किया गया। नाटक की कहानी चार बेरोजगार दोस्तों पर आधारित है, जो ठंड से बचने के लिए स्वयं को अपराधी बताकर जेल पहुंचते है। नाटक के इस मंचन ने दर्शकों की आंखें नम कर दी।
गढ़वाल विवि के लोक कला एवं निस्पादन केंद्र की ओर आयोजित बाल उलार नाट्य समारोह में मंगलवार देर शाम मंचित नाटक की सधी पटकथा व कलाकारों के जीवत अभिनय ने दर्शकों को अंत तक बांधे रखा। ‘हवालात’ नाटक के कथानक के अनुसार 4 दोस्त सर्द ठंडी रात में ठंड से परेशान होकर एक पेड़ को पकड़ कर अपने को गर्म करने का प्रयास करते हैं। तभी अचानक एक पुलिस वाला वहां पहुंचता है। सभी लोग पुलिस के डर से वहां से भागने लगते हैं, लेकिन ये चारों दोस्त स्वयं को अपराधी घोषित करते हैं। ताकि वह जेल जाकर ठंड से बच सकें और आराम से रह सकें। नाटक के दौरान पुलिस और इन चारों दोस्तों में संवाद होता है। नाटक की सधी पटकथा व कलाकारों का जीवंत अभिनय देश में फैली बेरोजगारी व भ्रष्टाचार की समस्या को उजागर करने में सफल रहता है। सर्वेश्वर दयाल सक्सेना के लिखित इस नाटक का निर्देशन मुकेश शर्मा और अभिषेक डोभाल ने किया। नाटक के मुख्य पात्रों में अर्पण गर्ग, देवेंद्र रतूड़ी, राहत खान, प्रमोद सिंह गुसाईं, राजेश शर्मा आदि शामिल हैं। लोक कला निस्पादन केंद्र के डा. संजय पांडे ने कहा कि भविष्य में केंद्र की ओर से लोक कला संस्कृति और नाटकों पर शोध के उपरांत कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। कार्यक्रम के समापन अवसर पर प्रो. डीआर पुरोहित, प्रो. ओपी गुसाईं, डा. एसएस बिष्ट, डा. आशुतोष गुप्त, परवेज अहमद, महेश गिरी आदि मौजूद थे।