देश के विद्वानों की अनदेखी करने से बढ़ा योग का विदेशीकरण
ब्यूरो/अमर उजाला
ऋषिकेश। आधुनिक भीम के नाम से विश्व विख्यात योगगुरु व आयुर्वेदाचार्य ब्रह्मचारी विश्वपाल जयंत का कहना है कि भारत योग व आयुर्वेद के क्षेत्र में विश्व गुरु है, मगर यहां की सरकारें देश के विद्वानों को अनदेखा कर रही हैं, जिसके कारण योग का विदेशीकरण होने से इन विधाओं में विदेशी गुरुओं का ट्रेंड बढ़ रहा है। विदेशियों ने हम से ही आयुर्वेद व योग की शिक्षा ली है। तीर्थनगरी में इन दिनों आयोजित अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव में जिज्ञासुओं, साधकों को योग व आयुर्वेद की तालीम देने आए आधुनिक भीम ब्रह्मचारी विश्वपाल जयंत ने अमर उजाला से खास मुलाकात की। उन्होंने बताया कि योग की अंतरराष्ट्रीय राजधानी ऋषिकेश में संचालित योग सेंटरों में योग विद्या को मनमाने तरीके से सिखाया जा रहा है, जिससे देश-दुनिया के साधकों में गलत संदेश जा रहा है।
बताया कि इससे योग साधकों, जिज्ञासुओं में इस भारतीय प्राचीन पद्धति को लेकर भटकाव की स्थिति बन रही है। उन्होंने इसके लिए राज्य सरकार के स्तर पर एक समिति के गठन पर जोर दिया जो योग के सिद्धांतों पर कार्य करने वाले संस्थानों को ही संचालित करने की अनुमति दे। उन्होंने कहा कि देश में आयोजित होने वाले योग महोत्सवों में भारतीय गुरुओं को प्रमोट किया जाना चाहिए, जिससे विश्व फलक पर लोग योग के सिद्धांतों व रहस्यों से रूबरू हो सकेंगे। उन्होंने आशंका जताई कि योग के प्रचार का वर्तमान ट्रेंड बंद नहीं हुआ तो इस असमंजस में एक दिन फजीहत की स्थिति पैदा हो सकती है।
पश्चिमी संस्कृति न अपनाएं, विदेशियों को वैदिक संस्कृति बताएं
आधुनिक भीम बताते हैं कि योग व आयुर्वेद भारत की देन है, बावजूद इसके देश में आयोजित होने वाले योग महोत्सव में स्थानीय योग मर्मज्ञों को निहायत कम कक्षाएं मिल पाती हैं, जबकि हम से सीखकर विदेश में कार्य करने वाले लोगों को अधिक। उनका कहना है कि शिविरों में शामिल होने वाले जिज्ञासुओं को भारतीय वैदिक संस्कृति परंपरा से अवगत कराया जाना चाहिए, न कि उनकी संस्कृति को अपनाने का कल्चर स्थापित होना चाहिए। ब्रह्मचारी बोले, उनके मन को अक्सर यह बात काफी हद तक व्यथित करती है।