गैरसैंण। स्थायी राजधानी की मांग को लेकर अनशन पर बैठे चारों अनशनकारियों को बुधवार देर रात प्रशासन ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में जबरन उठाकर अस्पताल में भर्ती करा दिया। इस दौरान अनशनकारियों और समर्थकों की पुलिस-प्रशासन के साथ धक्कामुक्की हुई। पुलिस ने आंदोलनकारियों को एंबुलेंस में बैठाया तो समर्थक गाड़ी के आगे लेट गए। उन्हें हटाने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा। अनशनकारियों को अस्पताल पहुंचाया गया तो एक अनशनकारी ने इलाज कराने से इंकार कर दिया और पुलिस को चकमा देकर वह अनशनस्थल पर जा पहुंचा। पुलिस प्रशासन की इस कार्रवाई से गुस्साए समर्थकों ने बृहस्पतिवार को विरोध प्रदर्शन कर एसडीएम का घेराव किया और तहसील में सांकेतिक धरना दिया।
रामलीला मैदान में चल रहा आमरण अनशन 34 दिन पूरे कर चुका है। अनशन पर बैठे लोगों का स्वास्थ्य भी लगातार गिर रहा है। बुधवार देर रात करीब 12 बजे एसडीएम स्मृता परमार की मौजूदगी में प्रशासन ने अनशनकारियों को जबरन उठा दिया। उन्हें अस्पताल ले जाया जा रहा था, तभी आंदोलनकारियों की प्रशासन के साथ नोकझोंक और धक्का मुक्की हुई। पुलिस अनशनकारी प्रवीण सिंह, त्रिलोक सिंह, बिंदी देवी और महेश पांडे को एंबुलेंस में बैठाने लगी तो उनके समर्थक एंबुलेंस के आगे लेट गए। समझाने के बाद भी जब समर्थक नहीं माने तो पुलिस ने बल प्रयोग कर उन्हें हटाया और अनशनकारियों को अस्पताल में भर्ती कराया। प्रवीण सिंह, बिंदी देवी और त्रिलोक सिंह का अस्पताल में उपचार किया गया, जबकि अनशनकारी महेश पांडे ने उपचार लेने से इंकार कर दिया। कुछ देर अस्पताल में रहने के बाद महेश पुलिस को चकमा देते हुए फिर अनशन स्थल पहुंच गए और अनशन शुरू कर दिया। इस दौरान रात को ही आंदोलनकारियों ने अस्पताल में प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
पुलिस-प्रशासन की इस कार्रवाई से गुस्साए समर्थकों और आंदोलनकारियों ने बृहस्पतिवार को स्थायी राजधानी निर्माण संघर्ष समिति के नेतृत्व में नगर में जुलूस निकालकर विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने एसडीएम का घेराव कर तहसील में सांकेतिक धरना दिया। समिति के अध्यक्ष नारायण सिंह ने कहा कि प्रशासन रात में अंधेरे का फायदा उठाकर अनशनकारियों को जबरन उठा रहा है। आरोप लगाया कि प्रशासन ने आंदोलनकारियों के साथ धक्कामुक्की की, जिसमें कई आंदोलनकारी चोटिल हुए। उन्होंने एसडीएम को शिकायती पत्र देते हुए कहा यदि प्रशासन ने रात में की जाने वाली कार्रवाई बंद नहीं की तो आंदोलनकारी अज्ञात स्थान पर आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। प्रदर्शन करने वालों में धनीराम, वीरेंद्र विष्ट, रामप्रसाद उप्रेती, श्रीनगर से प्रदीप डुकलान, कमला पंवार, सरोज शाह, सुरेंद्र लाल, लक्ष्मण पंवार, लक्ष्मण खत्री, देवेंद्र ,जसवंत सिंह, वीरेंद्र प्रसाद जोशी, नंदन नेगी, मंजू बिष्ट आदि शामिल थे। इधर, एसडीएम स्मृता परमार ने आंदोलनकारियों के धक्कामुक्की करने और चोटिल होने के आरोप को बेबुनियाद बताया।
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होल्यारों ने दिया समर्थन
गैरसैंण। रामलीला मैदान में चल रहे राजधानी आंदोलन को होल्यारों ने भी समर्थन दिया। वहीं दूसरी ओर अनशन पर डटे राज्य आंदोलनकारी धूमा देवी और महेश पांडे के समर्थन में महिला मंगल दल गैड़ ने समर्थन देते हुए धरना दिया।