गोपेश्वर/कर्णप्रयाग। थराली विधायक मगन लाल शाह की लंबी बीमारी के बाद निधन होने से भाजपा जिला संगठन को झटका लगा है। भाजपा ने चमोली में एक मजबूत स्तंभ खो दिया है। वर्ष 2007 से अनुसूचित जाति मोर्चे के प्रदेश अध्यक्ष रहते उन्होंने जिले में पार्टी के पक्ष में अनुसूचित जाति के वोट बैंक को मजबूत किया।
स्व. मगन लाल शाह (57) ने वर्ष 1992 में राजनीति में कदम रखा था। उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी राजनीति में लाए थे। वर्ष 2007 में विधानसभा चुनाव में उन्होंने भाजपा से टिकट से दावेदारी की, लेकिन उन्हें टिकट नहीं मिला। तब उन्होंने यूकेडी से चुनाव लड़ा, लेकिन बीजेपी के गोविंद लाल शाह जीते। इसके बाद त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में क्षेत्र पंचायत वार्ड गंडी कफौली क्षेत्र से उन्होंने चुनाव लड़ा और वर्ष 2008 में नारायणबगड़ विकास खंड के ब्लॉक प्रमुख की कमान संभाली। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने उन पर फिर भरोसा जताया, लेकिन वे कांग्रेस के डा. जीतराम से हार गए। वर्ष 2014 में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में उनकी धर्मपत्नी मुन्नी देवी शाह भाजपा से जीत दर्ज कर चमोली की जिला पंचायत अध्यक्ष बनी। इसके बाद वर्ष 2017 के विस चुनाव में पार्टी ने मगन लाल शाह पर एक बार फिर भरोसा जताया। उन्होंने जीत दर्ज कर कांग्रेस प्रत्याशी डा. जीतराम को चार हजार से अधिक मतों से हराया। विधायक महेंद्र भट्ट का कहना है कि उनके साथ बिताए दिन ताउम्र याद रहेंगे। उनके निधन से संगठन को भारी क्षति पहुंची है। बदरीनाथ के पूर्व विधायक राजेंद्र भंडारी का कहना है कि मगन लाल शाह का असमय निधन बेहद दुखदाई है। जिला पंचायत उपाध्यक्ष लखपत बुटोला का कहना है कि विधायक मगनलाल विनम्र व्यक्तित्व के धनी थे। ऊर्जावान जन नेता के अचानक चले जाने से जिले को बहुत गहरा दुख पहुंचा है।
भरापूर परिवार छोड़ गए शाह
कर्णप्रयाग। विधायक शाह अपने पीछे पत्नी मुन्नी शाह, बड़ा बेटा गणेश शाह, पुत्रवधु सुमन, छोटा बेटा सूरज शाह, बेटी नीलम, चंदा और गीता सहित नाती, पोतों का भरा पूरा परिवार को छोड़ गए हैं। गणेश, नीलम और चंदा का विवाह हो चुका है। जबकि सूरज इंजीनियंरिग कॉलेज घुड़दौड़ी से इंजीनियरिंग और बेटी गीता देहरादून से एमबीबीएस कर रही है।
स्कूटी से विधानसभा पहुंचे थे विधायक शाह
कर्णप्रयाग। विधायक निर्वाचित होने के बाद मगन लाल शाह विधानसभा स्कूटी में पहुंचे थे। स्कूटी में विधानसभा पहुंचने के बाद पूरे प्रदेश की राजनीति में चर्चा में आ गए थे। यही नहीं दिसंबर 2018 में भराड़ीसैंण में आयोजित सत्र के दौरान पहाड़ और थराली विधानसभा से जुड़ी कई समस्याएं सदन में रखी थी।