ब्यूरो/ ऋषिकेश। तीर्थनगरी ऋषिकेश को रोजमर्रा के जाम से निजात दिलाने की योजनाएं परवान नहीं चढ़ पा रही हैं। शहर के विभिन्न महत्वपूूर्ण व व्यस्त मार्गों पर स्थापित बैंकों और सरकारी कार्यालयों को एक छत के नीचे लाने का एचआरडीए का प्लान भी सब्जबाग साबित होता नजर आ रहा है। वजह, प्रस्तावित योजना के महीनों बाद भी मल्टीपरपज बिल्डिंग के निर्माण को लेकर सिर्फ हवाई बातें हो रही हैं। जबकि धरातल पर योजना की स्थिति शून्य नजर आ रही है।
हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण (एचआरडीए) ने शहर में नगर निगम की दशकों पुरानी बिल्डिंग जमींदोज कर वाहन पार्किंग और बैंक शाखाओं को एक छत के नीचे लाने के लिए मल्टीपरपज बिल्डिंग निर्माण की पेशकश की थी। बीते वर्ष नगर पालिका बोर्ड में इसका प्रस्ताव भी रखा गया था, जिसे बोर्ड ने मंजूरी भी दे दी थी। एचआरडीए के सचिव बंशीधर तिवारी का कहना था कि शीघ्र योजना पर कार्य शुरू किया जाएगा। प्राधिकरण की इस पेशकश से शहर में पार्किंग के अभाव में विभिन्न मार्गों पर बेतरतीब खड़े होने वाले वाहनों के कारण लगने वाले जाम से स्थानीय लोगों व देश दुनिया से यहां आने वाले सैलानियों को निजात मिलने की उम्मीद जगी थी, लेकिन महीनों बाद भी इस दिशा में कोई कार्रवाई होती नजर नहीं आ रही है।
फुटकर सब्जी मंडी का मामला भी अधर में
नगर में सरकारी मार्ग पर अवैध तरीके से संचालित हो रही फुटकर सब्जी मंडी को चंद्रभागा नदी के किनारे शिफ्ट करने का मामला पहले ही अधर में है। लिहाजा फुटकर सब्जी मंडी जीवनी माई रोड पर दशकों से अनधिकृत तौर पर संचालित हो रही है। मार्ग के दोनों ओर अस्थायी तौर पर लगाए गई ठेलियों की वजह से वाहनों की दुपहिया आवाजाही के साथ ही लोगों के लिए पैदल चलना तक मुश्किल होता है। लेकिन मंडी को अन्यत्र शिफ्ट करने को लेकर नगर निगम प्रशासन गंभीर नहीं दिख रहा।
शहर में यहां अक्सर लगता है जाम
शहर में दून मार्ग पर विभिन्न बैंक शाखाओं और हरिद्वार रोड स्थित पीएनबी की शाखा की पार्किंग नहीं होने से जाम लगता है। इसके अलावा पार्किंग नहीं होने से शहर में खरीदारी को आए नागरिकों और सैर सपाटे को आए सैलानियों को मजबूर होकर अपने वाहनों को सड़कों के किनारे फुटपाथ पर पार्क करना पड़ता है, जिससे हरिद्वार रोड, दूनमार्ग, रेलवे रोड आदि मार्गों पर जाम की स्थिति बनी रहती है।
महज पत्थर बनकर रह गया शिलापट
नगर निगम परिसर में 12 वर्ष पूर्व यानि वर्ष 2006 में तत्कालीन मुख्यमंत्री एनडी तिवारी ने बहुउद्देशीय कांपलेक्स योजना की नींव रखी थी, लेकिन दशकभर से अधिक समय बीत जाने के बाद भी योजना का श्रीगणेश नहीं हो पाया है। लिहाजा, निगम परिसर में स्थापित शिलापट महज पत्थर बनकर ही रह गया है।
क्या कहते हैं अधिकारी
एचआरडीए का प्रस्ताव नगर पालिका के बोर्ड के कार्यकाल में आया था। अब पालिका उच्चीकृत होकर नगर निगम बन गई है। लिहाजा प्राधिकरण अब कोई प्रस्ताव देता है, तो इसका परीक्षण कर स्वीकृति के लिए प्रशासन को प्रेषित किया जाएगा।
महेंद्र कुमार यादव, सहायक नगर आयुक्त, नगर निगम, ऋषिकेश
मल्टीपरपज बिल्डिंग की डीपीआर केंद्र सरकार की एजेंसी वेबकॉस से तैयार करा ली गई है। करीब 114 करोड़ रुपये बिल्डिंग के निर्माण पर खर्च हो सकते हैं। इसके लिए अब टेंडर कॉल किया जा रहा हैं। निर्माण को पीपीपी मोड पर कराया जाना प्रस्तावित है।
-- बंशीधर तिवारी, सचिव, एचआरडीए।