श्रीनगर। राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर में जूनियर रेजीडेंट (जेआर) को रिलीव करने और प्रशिक्षु डॉक्टरों के हड़ताल पर होने के बाद से फैकल्टी (संकाय सदस्य) के ऊपर बेस अस्पताल की पूरी जिम्मेदारी आ गई है। जेआर और इंटर्न का काम पैरामेडिकल स्टाफ कर रहा है।
हालांकि स्त्री रोग एवं प्रसूति विभाग, बाल रोग व मेडिसिन विभाग में इसका हल्का असर दिखाई दे रहा है। अस्पताल के इमरजेंसी, शिशु गहन निगरानी इकाई (एनआईसीयू) और प्रसूति विभाग में संकाय सदस्यों (प्रोफेसर, एसोसिएट प्रो. व सहायक प्रो.) पर लोड बढ़ गया है। यह वार्ड ऐसे हैं, जहां 24 घंटे डॉक्टरों की जरूरत पड़ती है। इधर, कॉलेज प्रशासन ने समस्या के समाधान के लिए कॉलेज के नॉन क्लीनिकल विभाग के संकाय सदस्यों की ड्यूटी भी बेस अस्पताल में लगा दी है।
मेडिकल कॉलेज में संकाय सदस्यों/विशेषज्ञ चिकित्सकों (क्लीनिकल एवं नॉन क्लीनिकल) के 99 पद स्वीकृत हैं, लेकिन इसकी तुलना में सिर्फ 60 ही संकाय सदस्य कार्यरत हैं। क्लीनिकल विभाग के विशेषज्ञ डॉक्टरों को ओपीडी, आईपीडी, आपरेशन और कॉलेज में कक्षाओं के संचालन की जिम्मेदारी निभानी पड़ती है। इमरजेंसी विभाग में जेआर और इंटर्न ही तैनात रहते हैं। कॉल करने पर संबंधित विशेषज्ञ इमरजेंसी में आते हैं। 74 जेआर को एक साथ रिलीव किए जाने से अस्पताल की ओपीडी पर असर नहीं पड़ा है। 24 से 31 जनवरी के बीच अस्पताल की ओपीडी 470 से 715 तक रही है। ओपीडी यथावत रहने की वजह यह है कि कॉलेज में जेआर (एमबीबीएस) डॉक्टर विशेषज्ञ डॉक्टर की सुपरविजन में काम करते हैं। जेआर उनके सहायक के रुप में तैनात रहते हैं। कॉलेज प्रशासन ने यह काम पैरामेडिकल स्टाफ को दे दिया है।
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सभी फैकल्टी मेंबर्स की ड्यूटी रोस्टर के अनुसार बेस अस्पताल में लगा दी गई है। अस्पताल की गतिविधि सामान्य रुप से चल रही है। पैरामेडिकल स्टाफ सहयोगी के रुप में काम कर रहा है। सीनियर रेजीडेंट भी ड्यूटी पर तैनात हैं। इमरजेंसी में सीनियर डॉक्टर राउंड कर रहे हैं।
-प्रो. सीएम रावत, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज श्रीनगर।