श्रीनगर। राजकीय मेडिकल कॉलेज से संबद्ध बेस अस्पताल में जूनियर चिकित्सकों को सुरक्षित प्रसव के तरीके के बारे में बताया गया। कार्यक्रम में संकाय सदस्यों, जूनियर रेजीडेंट और इंटर्न डॉक्टरों को आईएमआर/एमएमआर (शिशु/मातृ मृत्यु दर) को कम करने की भी जानकारी दी गई।
केंद्र सरकार के एनएचएम (राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन) के तहत वृद्धि (वीआरआईडीडीएचआई) के सहयोग से सम्मान (सेफ मदरहुड, मेटरनल एंड न्यूबोर्न) कार्यक्रम चलाया जा रहा है। मंगलवार को मेडिकल कॉलेज के स्त्री रोग एवं प्रसूति, बाल रोग और कम्युनिटी मेडिसिन विभाग की ओर से कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें वृद्धि प्रोजेक्ट के विशेषज्ञों ने मेडिकल कॉलेज श्रीनगर के जूनियर चिकित्सकों और संकाय सदस्यों को सुरक्षित प्रसव की जानकारी दी। इस अवसर पर बताया गया कि मेडिकल कॉलेज के छात्रों के साथ सरकार का दुर्गम क्षेत्रों में 5 साल तक सेवा देने का अनुबंध है।
विशेषज्ञों ने बताया कि आईएमआर/एमएमआर कम करने के लिए अस्पताल में प्रसव कराया जाना चाहिए। ताकि जच्चा-बच्चा की उचित देखभाल हो सके। उन्होंने सुरक्षित प्रसव के तरीके भी बताए। इस मौके पर बेस अस्पताल के प्रभारी चिकित्सा अधीक्षक डा. सतीश कुमार, कम्युनिटी एचओडी प्रो. अमित सिंह, स्त्री रोग एचओडी प्रो. सुचित्रा जैन, बाल रोग एचओडी डा. आनंद जैन, सहायक प्रो. वरुण तिवाड़ी आदि मौजूद थे। वृद्धि प्रोजेक्ट के राज्य तकनीकि हेड डा. नितिन बिष्ट, डा. जयदेव, डा. रिचा और डा. अभिषेक ने प्रशिक्षण दिया।