ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
तीन तलाक पर कानून बनना ठीक है, लेकिन समाज सुधार की दिशा में जितने भी काम हो रहे हैं, इनमें सबको साथ लेकर चलना चाहिए। यह कहना है पूर्व लोकसभा सांसद एवं सीपीआई (एम) पोलित ब्यूरो की सदस्य सुभाषिनी अली का। बृहस्पतिवार को वह राजपुर रोड स्थित रूलक कार्यालय में ‘देश को आजाद हुए 70 वर्षों में हमने क्या खोया क्या पाया’ विषय पर आयोजित कार्यशाला को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रही थीं।
उन्होंने कहा कि हमें बहुत शांतिपूर्वक स्वतंत्रता हासिल हुई थी, लेकिन हम अपने संविधान की अहमियत नहीं समझ पाए। डॉ.भीवराव अंबेडकर का संविधान निर्माण में अहम योगदान रहा, जिससे सबको समान अधिकार मिला। पूर्व सांसद ने कहा कि 2014 लोकसभा चुनाव में जनता से विकास और रोजगार का वादा किया गया, लेकिन बाद में उसकी जगह जातिगत और धार्मिक भेदभाव ने ले ली। रूलक के अध्यक्ष एवं पद्मश्री अवधेश कौशल ने कहा कि देश को आजाद हुए 70 वर्ष बीत चुका है। लेकिन कुछ लोगों के अनुसार, इन 70 वर्षों में कोई विकास नहीं हुआ। देश में, जो भी हुआ है वह पिछले तीन वर्षों में हुआ।
जबकि कुछ लोगों के अनुसार, पिछले तीन वर्ष देश पर भारी गुजरे हैं। राष्ट्र की आर्थिक एवं सामाजिक स्थिति बहुत बिगड़ गई है। वैज्ञानिक डॉ.धीरेंद्र शर्मा ने कहा कि इन 70 वर्षों में विज्ञान के विकास और नागरिकों के ज्ञानर्जन के कारण काफ ी अंधविश्वास खत्म हुए हैं। वरिष्ठ पत्रकार राज कंवर ने पंडित जवाहरलाल नेहरू को याद करते हुए कहा धर्मनिरपेक्ष संसदीय लोकतंत्र नेहरू की सबसे बड़ी देन है। उन्होंने लाल बहादुर शास्त्री, पी.वी.नरसिम्हा राव और इंदिरा गांधी के भारत निर्माण में योगदान पर भी चर्चा की। कार्यशाला में विधि विश्वविद्यालय और सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों समेत अन्य ने प्रतिभाग किया।