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‘सर्वोच्च पद’ ही सबसे ज्यादा विवादित

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ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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उत्तराखंड के विश्वविद्यालयों में सर्वोच्च कुलपति का पद सबसे ज्यादा विवादों में हैं। बीते एक साल की बात करें तो प्रदेश के तमाम राज्य विश्वविद्यालयों में कुलपतियों के विवाद सामने आए। कहीं कुलपति का कर्मचारियों से टकराव हुआ तो कहीं जन्मतिथि और प्रमाण पत्रों को लेकर कुलपति विवादों में रहे। तकनीकी विवि के कुलपति के टकराव के बाद इन दिनों दून विवि की कार्यवाहक कुलपति का शासन से टकराव विवादों में है। ऐसे ही विवादों पर एक नजर...
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केंद्रीय विवि : अनियमितताओं में राष्ट्रपति ने कुलपति को हटाया
गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जेएल कौल को हाल ही में राष्ट्रपति एवं विवि के विजिटर रामनाथ कोविंद ने पद से हटा दिया है। उन पर कॉलेजों में नियम विरुद्ध सीटें बढ़ाने सहित कई अनियमितताओं के आरोप लगे थे। मामले की केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने जांच कराई। जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रो. जेएल कौल को पद से हटाने की संस्तुति मंत्रालय ने विवि के विजिटर एवं राष्ट्रपति को कर दी। राष्ट्रपति ने संस्तुति को स्वीकार करते हुए प्रो. कौल को पद से हटा दिया।
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तकनीकी विवि : राज्यपाल ने कुलपति प्रो. गर्ग को कार्य से विरत किया
उत्तराखंड तकनीकी विवि में लगातार अनियमितताएं, शिकायतें और वित्तीय गड़बड़ियों को लेकर करीब एक साल तक कुलपति प्रो. पीके गर्ग विवादों में रहे। आखिरकार दो माह पहले विवि के कुलाधिपति एवं राज्यपाल डॉ.केके पाल ने उन्हें कार्य से विरत कर दिया। उनकी जगह श्रीदेव सुमन विवि के कुलपति डॉ.यूएस रावत इन दिनों तकनीकी विवि की अतिरिक्त जिम्मेदारी उठा रहे हैं। प्रो. पीके गर्ग के खिलाफ जांच चल रही है, जिसकी रिपोर्ट आने के बाद ही प्रो. गर्ग पर कोई फैसला लिया जाएगा।
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आयुर्वेद विवि : जन्मतिथि गलत बताकर बने थे कुलपति
एक साल पहले उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय में प्रो. सत्येंद्र प्रसाद मिश्र अपनी गलत जन्मतिथि बताकर कुलपति बन गए थे। मामले में किसी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिस पर हाईकोर्ट ने फैसला लिया था। मामले में आखिरकार कुलपति प्रो. एसपी मिश्र को इस्तीफा देना पड़ा था। अब उनसे 42 लाख रुपये की वसूली की जानी है, जो उनके दूसरे कार्यकाल में उन्हें बतौर वेतन एवं भत्ता प्रदान किया गया था।
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दून विवि : कार्यवाहक कुलपति का शासन से टकराव
इन दिनों दून विवि में कोई स्थायी कुलपति नहीं है। राजभवन के आदेश पर प्रो. कुसुम अरुणाचलम् को कार्यवाहक कुलपति बनाया गया है। अपने कार्यकाल में पहले छात्रों से रार को लेकर अब सीधे शासन से टकराव को लेकर प्रो. अरुणाचलम् विवादों में हैं। नियम विरुद्ध उन्होंने विवि के छात्र परिषद के अध्यक्ष को निष्कासित कराने का दबाव बनाया। छात्र निष्कासित भी कर दिया गया, लेकिन जब विवि को अपनी गलती का अहसास हुआ तो फैसला वापस ले लिया गया। इसके बाद आजकल शासन से भेजे गए कुलसचिव डॉ.सुधीर बुड़ाकोटि की तैनाती पर कार्यवाहक कुलपति विरोध में उतरी हुई हैं।
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उत्तराखंड संस्कृत विवि : कुलपति के प्रमाण-पत्रों पर विवाद
उत्तराखंड संस्कृत विवि के कुलपति पीयूषकांत दीक्षित बीते दिनों प्रमाण-पत्रों पर विवाद को लेकर चर्चाओं में रहे। मामले में रुड़की निवासी पवन कुमार उपाध्याय ने हाईकोर्ट में एक याचिका भी दायर की थी। आरोप था कि पीयूषकांत दीक्षित ने 11 वर्ष की आयु में ही 10वीं की परीक्षा पास कर ली थी। प्रमाण-पत्रों के हिसाब से संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय विवि, वाराणसी से पूर्ण मध्यमा परीक्षा (हाई स्कूल के समकक्ष) वर्ष 1975 में 11 वर्ष की आयु में उत्तीर्ण की। इसके बाद उत्तर मध्यमा (इंटर) वर्ष 1977 में, शास्त्री परीक्षा (स्नातक) वर्ष 1979 में और आचार्य (स्नातकोत्तर) वर्ष 1982 में उत्तीर्ण की है। जबकि, उन्होंने इसी विवि से 1990 में पीएचडी भी की है। इसी आधार पर पीयूष ने 11 वर्ष की आयु में हाई स्कूल, 13 वर्ष में इंटर और 15 वर्ष की आयु में स्नातक की परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके अलावा पीयूषकांत दीक्षित महंगी कुर्सी को लेकर चले विवाद में भी चर्चाओं में रहे थे।
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पंतनगर विवि : कार्यवाहक कुलपति के भरोसे
गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर के कुलपति डा. मंगला राय भी काफी विवादों में रहे। उनके खिलाफ सभी कर्मचारियों ने मोर्चा खोल दिया। शासन से भी टकराव रहा। नतीजतन कार्यकाल के बीच में ही डा. मंगला राय इस्तीफा देकर चले गए। काफी समय से पंतनगर विवि कार्यवाहक कुलपति डा. एके मिश्रा के सहारे चल रहा है।
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