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एम्स प्रशासन का पुतला फूंका

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सिटी गेट पर एम्स प्रशासन का पुतला फूंका
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-- केंद्र सरकार से की संस्थान के निदेशक को हटाने की मांग
अमर उजाला ब्यूरो
श्यामपुर। विस्थापित समन्वय विकास समिति, पशुलोक ने स्थानीय बेरोजगारों की उपेक्षा व भ्रष्टाचार के विरोध में आईडीपीएल सिटी पर एम्स प्रशासन का पुतला फूंका। इस मौके पर समिति के अध्यक्ष हरि सिंह भंडारी ने कहा कि एम्स निदेशक संस्थान को मनमाने तरीके से संचालित कर रहे हैं। आईडीपीएल सिटी गेट के समीप समिति के सदस्यों ने मंगलवार को एम्स प्रशासन का पुतला फूंका। इस अवसर पर कहा गया कि केंद्र सरकार ने उत्तराखंड में स्थानीय लोगों की बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए एम्स स्थापित किया था, ताकि स्थानीय बेरोजगारों को रोजगार मिल सके।
एम्स प्रशासन उत्तराखंड वासियों को नजरंदाज कर रहा है। कहा कि केंद्र सरकार को एम्स निदेशक के खिलाफ वित्तीय जांच कर तत्काल पद से हटाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब तक समिति की मांगे पूरी नहीं होंगी आंदोलन जारी रहेगा। पुतला फूंकने वालों में विस्थापित समन्वय समिति के सचिव जगदंबा सेमवाल, कर्ण सिंह पडियार, मुरारी सिंह गुसाईं, अर्जुन मित्रा, प्रकांत कुमार, मनोज सिंह, प्रवेश सिंह आदि शामिल थे।
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क्या कहता है एम्स प्रशासन
उधर, एम्स प्रशासन ने समिति द्वारा लगाए गए आरोपों को सिरे से खारिज किया है। संस्थान के जनसंपर्क अधिकारी हरीश थपलियाल ने बताया कि एम्स निदेशक पर लगाए गए तमाम आरोप बेबुनियाद हैं। उन्होंने बताया कि एम्स निदेशक डा. रवि कांत की संस्थान में नियुक्ति से पहले देश के विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों और व्यक्तियों की ओर से विजिलेंस क्लीयरेंस दिया गया है। मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज नई दिल्ली, एम्स भोपाल, उत्तर प्रदेश सरकार, 2015 में पद्मश्री के लिए नामित किए जाने से यूपी के मुख्यमंत्री, यूपी के राज्यपाल, आईबी आदि संस्थानों व व्यक्तियों द्वारा प्रोफेसर डा. रवि कांत को विजिलेंस क्लीयरेंस दी है। पीआरओ ने बताया कि सरकार में किसी भी कर्मचारी को विजिलेंस क्लीयरेंस मिलना उनकी इमानदारी का सुबूत है।
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