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बाक्सिंग एसोसिएशन प्रदेश महासचिव के पक्ष में लामबंद हुए पदाधिकारी

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हरिद्वार। उत्तराखंड बाक्सिंग एसोसिएशन के महासचिव डा. धर्मेंद्र भट्ट पर महिला खिलाड़ी की ओर से गंभीर आरोप लगाए जाने के बाद एसोसिएशन लामबंद हो गई है। प्रकरण को लेकर हरिद्वार बाक्सिंग एसोसिएशन के पदाधिकारियों की बैठक में इसकी निंदा करते हुए महिला खिलाड़ी और खेल विभाग के कुछ अधिकारियों की साजिश करार दिया।
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बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष डा. विशाल गर्ग ने कहा कि खेल विभाग के कुछ अधिकारी महिला खिलाड़ी पारुल शर्मा से सांठगांठ करके एसोसिएशन को बदनाम कर रहे हैं। जबकि हकीकत यह है कि महिला खिलाड़ी पारुल शर्मा खुद ही गलत हैं। महिला खिलाड़ी का यह आरोप निराधार है कि महासचिव के कहने पर पारुल शर्मा को कैंप से हटाया गया जबकि हकीकत यह है कि बाक्सिंग फेडरेशन आफ इंडिया के पदाधिकारियों द्वारा कार्रवाई की गई। इस पूरे प्रकरण में राज्य स्तरीय इकाई का कोई लेनादेना नही है।
जिलाध्यक्ष डा. विशाल गर्ग का कहना है कि अनुशासनहीनता के चलते साल 2016 में भी प्रतिबंध लगाने की बात की गई थी, लेकिन पारुल शर्मा के लिखित माफीनामे के बाद प्रतिबंध हटा लिया गया था। उनके खेल विरोधी कृत्यों के चलते बाक्सिंग फेडरेशन आफ इंडिया ने सितंबर 2017 में तीन साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया। इस संबंध में बीएफआई की ओर से लिखित जानकारी खेल विभाग को भी देे दी गई है। जिलाध्यक्ष ने आरोप लगाया कि खिलाड़ी पारुल हरियाणा की रहने वाली है लेकिन उन्होंने आधार कार्ड विकासनगर देहरादून का दिया है जो कि गलत है इसकी भी जांच होनी चाहिए। खिलाड़ी पारुल शर्मा ने जो भी आरोप लगाए थे उसकी भारतीय खेल प्राधिकरण के अफसरों द्वारा जांच की गई थी और उसकी रिपोर्ट खेल विभाग के अधिकारियों को दी गई थी । अधिकारियों ने रिपोर्ट को सार्वजनिक नही किया जो कि सरासर गलत हैं। जिसकी वजह से असलियत सामने नही आ पाई। इसके लिए खेल विभाग के अफसर न ही कि संघ के पदाधिकारी दोषी हैं। पत्रकार वार्ता में एसोसिएशन के सचिव नवीन चौहान, सचिन अरोड़ा, संरक्षक अरविंद पंवार आदि उपस्थित थे।
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