कर्णप्रयाग। गैरसैंण ब्लाक के चौरासैंण, भटक्वाली सहित आसपास के पांच गांवों का सड़क के लिए 35 साल का इंतजार अब जल्द खत्म होगा। गांवों के लिए स्वीकृत मालई-भटक्वाली सड़क पर प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत शुक्रवार को काम शुरू हो गया है। सड़क निर्माण में जेसीबी मशीन और मजदूर जुटे हैं। ग्रामीणों ने कहा कि अब 6 किमी की पैदल और घने जंगल की दूरी से निजात मिल सकेगी।
कर्णप्रयाग ब्लाक की सीमा से लगे गैरसैंण ब्लाक के चौरासैंण, लुतुडुग्वाड़, बेढुंगा, खोलीडीप आदि गांवों में करीब 135 परिवारों की 750 से अधिक आबादी है। अभी तक ग्रामीण नौटी-नंदासैंण सड़क पर बैनोली से सीधी और खड़ी चढ़ाई पार कर गांव पहुंचते थे। घने जंगल के कारण यहां से गुजरने में जंगली जानवरों का खतरा बना रहता था। ग्रामीण लगातार सड़क की मांग कर रहे थे। सड़क निर्माण संघर्ष समिति के अध्यक्ष राम सिंह, प्रधान पुष्पा देवी, सरपंच द्वारिका प्रसाद और लक्ष्मण सिंह आदि ने बताया कि सड़क पांच साल से वन अधिनियम में अटकी हुई थी। गांव में सड़क सुविधा मिलने से अब गांव से लोगों का पलायन रुक सकेगा। वहीं पीएमजीएसवाई के सहायक अभियंता सचिन ने बताया कि मालई-भटक्वाली सड़क करीब 5 किमी बननी है, जिसके प्रथम चरण में कटिंग और दीवारों का निर्माण करने के लिए 2 करोड़ 40 लाख की स्वीकृति मिली है। उन्होंने बताया कि 15 माह में सड़क के प्रथम चरण का काम पूरा हो जाएगा।
ग्रामीणों ने बनाई थी दो किमी सड़क
वर्ष 2012 में यहां पीएमजीएसवाई के तहत पांच किमी सड़क की स्वीकृति मिली थी, लेकिन घना जंगल होने के कारण लंबे सड़क वन अधिनियम में लटकी रही। इससे नाराज ग्रामीणों ने 14 अक्तूबर 2015 से स्वयं सड़क निर्माण करना शुरू किया। करीब एक सप्ताह तक ग्रामीणों ने दो किमी तक सड़क का निर्माण किया। अमर उजाला ने इस संबंध में लगातार खबरें प्रकाशित कीं, जिसके बाद प्रशासन, वन विभाग, प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के अधिकारियों ने संज्ञान लिया। यही नहीं सड़क को लेकर गांव में नब्बे वर्षीय किरूली देवी और कृष्णा देवी (किरूली देवी) ने अनशन भी किया। आंदोलन देख तत्कालीन विधायक डा. अनसूया प्रसाद मैखुरी की पहल पर पीएमजीएसवाई के अधिकारियों ने एक साल में सड़क निर्माण का भरोसा ग्रामीणों को दिया। लगातार प्रयास के बाद वर्ष 2016 में सड़क को वन अधिनियम से स्वीकृति मिली और शुक्रवार से इसका काम शुरू हो गया।