अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
शासन ने अब तक यह साफ नहीं किया है कि नगर निगम में कितने वार्ड होंगे। ऐसे में अब तक न तो वार्डों के पुनर्गठन के लिए परिसीमन का काम शुरू हो पा रहा है और न मतदाता सूची बनाने का काम। नगर निगम प्रशासन को सूझ नहीं रहा है कि कहां से शुरू करें और कहां खत्म करें।
नगर निगम के वार्डों के परिसीमन के लिए सर्वे का काम नहीं हो पा रहा है। वार्ड तय नहीं होने से मतदाता सूचियां बनाने के लिए कर्मचारियों की नियुक्ति भी लटकी हुई है। स्थानीय निकाय निर्वाचनालय ने 8 नवंबर से मतदाता के नाम दर्ज करने का कार्यक्रम घोषित कर दिया था, लेकिन नगर निगम प्रशासन ने 15 दिन असमंजस में ही बीता दिए हैं। चूंकि मतदाता सूची वार्डवार बनाई जानी हैं, जबकि अभी यह साफ नहीं है कि वार्ड कितने बनेंगे।
शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने पिछले सप्ताह कहा कि था कि नगर निगम 60 वार्ड का होगा और परिसीमन पर दो-तीन दिन में अंतिम निर्णय ले लिया जाएगा। एक सप्ताह बाद भी इस पर अमल नहीं हो पाया है। शासन स्तर पर मंगलवार को जिन 10 निकायों के परिसीमन को अंतिम रूप दिया गया है उसमें नगर निगम शामिल नहीं है। परिसीमन के कार्य में लगे नगर निगम के कर्मचारियों का कहना है कि नियमानुसार 50 वार्ड ही बनाए जा सकते हैं, परंतु जब तक परिसीमन का गजट नहीं हो जाता है तब तक कुछ भी नहीं कहा जा सकता है। सूत्रों ने बताया कि शहरी विकास मंत्री बृहस्पतिवार को देहरादून में रहेंगे और परिसीमन पर अंतिम निर्णय हो सकता है।
नेताओं ने चक्कर लगाने शुरू किए
एक तरफ अभी वार्डों का निर्णय हो पाया है। वहीं पार्षद बनने की तैयारी में जुटे नेताओं ने अपने वार्ड की स्थिति जानने के लिए नगर निगम के मानचित्रकार दिनेश कांडपाल, अखिलेश शर्मा व वेदपाल के पास चक्कर लगाने शुरू कर दिए हैैं। नेता अपने-अपने हिसाब से वार्ड का परिसीमन कराने के लिए डोरे डालने लगे हैं। कई तो संदेह जता रहे हैं कि नगर निगम कर्मचारियों ने चुपचाप सब काम कर दिया है और उन से छिपाया जा रहा है।
नगर निगम सीमा विस्तार के परिसीमन का गजट भी नहीं हो पाया है। जब तक गजट नहीं होता है तब तक कुछ भी बता पाना संभव नहीं है। अभी तक ब्लाक तथा वार्ड बनाने का काम भी नहीं हो रहा है। एक बार शासन स्तर से परिसीमन का गजट हो जाए और वार्डों की संख्या निर्धारित हो जाए तो ही वार्डों के परिसीमन का काम शुरू हो पाएगा। - पीके बंसल सहायक नगर अधिकारी, नगर निगम