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पतंजलि ने गांव-गांव शुरू किए स्वदेशी अभियान

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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
स्वामी रामदेव की पतंजलि योगपीठ ने योग और प्राणायाम के साथ नैतिक शिक्षा देने के कार्यक्रम शुरू किए है। गांवों में शुरू किए गए इन कार्यक्रमों में स्वदेशी जागरण के माध्यम से विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार का कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। देश के सभी छह लाख गांवों में अभियान चलाने का लक्ष्य तय किया गया है।
योगगुरु स्वामी रामदेव करीब दस वर्षों से योगपीठ और भारत स्वाभिमान आंदोलन के माध्यम से स्वाभिमान जागृत करने के लिए अनेक प्रकार के अभियान चलाते रहे हैं। हाल के वर्षों में उन्हें विशेष उल्लेखनीय उपलब्धियां भी हासिल हुई हैं। वर्ष 2011 में दिल्ली के रामलीला मैदान से संपूर्ण परिवर्तन का अभियान शुरू किया गया था। तत्कालीन सत्ता को हटाने का लक्ष्य पूरा कर स्वामी रामदेव अब शिविरों के माध्यम से जनजागरण के अन्य कार्य चला रहे हैं। पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण के बताया कि पतंजलि योगपीठ की शाखाएं देश के सभी जिला और तहसील मुख्यालयों पर लंबे समय से कार्यरत है। बाद में इसका विस्तार कस्बों तथा बड़े गांवों तक किया गया। अब रामदेव का आंदोलन गांव-गांव फैलाया जा रहा है। उद्देश्य है कि बापू ने विदेशी के बहिष्कार का जो आंदोलन शुरू किया था, वह फिर से प्रारंभ हो जाए। बहुराष्ट्रीय कंप नियों ने देश के छोटे और मझौले उद्योगों को काफी हद तक किनारे किया है। अब फिर से गांव-गांव विकास की जो नीति बनाई गई है, उसमें पतंजलि परिवार भी भाग ले रहा है। अनेक आंदोलनों के माध्यम से प्रयास है कि देश वासी स्वदेशी वस्तुओं को ही खरीदना प्रारंभ करें।
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आचार्य बालकृष्ण ने बताया कि स्वामी रामदेव ने कोकाकोला और पेप्सी जैसे विदेशी शीतल पेय काफी हद तक बंद करा दिए हैं। अब भारतीय जनता स्वदेशी शीतल पेय तथा जूस पीना अधिक पसंद कर रही है। परिणाम स्वरूप इन दोनों बहुराष्ट्रीय कंपनी को भारत में काफी नुकसान उठाना पड़ है। अब अनेक क्षेत्रों में स्वदेशी का प्रयोग शुरु हो तथा यूनिलीवर जैसी कंपनियां देश वासियों को न लूट पाएं, इसके लिए पूरी तैयारी है।
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