फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चार आंदोलनकारियों पर केस, अन्य की तलाश में जुटी पुलिस

विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन
कर्णप्रयाग। अपनी मांगों को लेकर स्वास्थ्य व्यवस्था सुधार संघर्ष समिति का अनशन रविवार को भी जारी रहा। ग्वाड़ गांव की प्रसूता लक्ष्मी उर्फ गीता की मौत पर कार्रवाई न होने, अस्पताल में रिक्त पड़े पदों पर डॉक्टरों की नियुक्ति करने सहित बदरीनाथ हाईवे पर पिछले पांच सालों से खाली पड़े ट्रॉॅमा सेंटर को शुरू करने की मांग को लेकर स्वास्थ्य व्यवस्था सुधार संघर्ष समिति क्रमिक अनशन कर रही है। सीएम का काफिला रोकने के प्रयास में संघर्ष समिति के चार नामजद सदस्यों के समेत कई पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है।
दरअसल, शनिवार को सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत फलोटा गांव के शहीद सूरज तोपाल के अंतिम संस्कार में शामिल होने अलकनंदा और पिंडर के संगम पर पहुंचे थे। वापसी के दौरान बदरीनाथ हाईवे पर प्रतीक्षालय में धरने पर बैठे आंदोलनकारियों ने सीएम के काफिले को रोकने का प्रयास किया। ज्ञापन नहीं लेने पर अनशनकारियों ने सीएम के काफिले को रोकने का प्रयास किया। भाजपा ने इसे अनुशासनहीनता मानते हुए आंदोलनकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
विज्ञापन


भाजपा ने की बैठक, कार्रवाई की उठाई मांग
कर्णप्रयाग। शनिवार को सीएम के काफिले को रोकने की कोशिश और प्रदर्शन पर भाजपा भी गरम हो गई है। रविवार को भाजपा पदाधिकारियों ने आपात बैठक कर उपजिलाधिकारी के माध्यम से जिलाधिकारी को ज्ञापन भेजकर कार्रवाई की मांग की है।
रविवार को भाजपा पदाधिकारियों की बैठक में कहा गया कि शनिवार को सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत शहीद को श्रद्घाजंलि देने पहुंचे थे, लेकिन इस दौरान कुछ अराजक तत्वों द्वारा सीएम के काफिले को रोकने का प्रयास किया गया, जिससे भाजपाइयों ने पुलिस और प्रशासन की नाकामी बताया।
भाजपाइयों ने कहा कि सरकार जल्द पहाड़ में 250 डॉक्टरों की तैनाती करने जा रही है। भाजपा जिला उपाध्यक्ष अरूण मैठाणी, मंडल अध्यक्ष महिपाल सिंह नेगी, राजेश जोशी, जिला पंचायत सदस्य देवेंद्र नेगी, राकेश नेगी, आशीष थपलियाल, किशोरी रतूड़ी, दीपेंद्र नेगी आदि ने जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर मामले में कार्रवाई की मांग की है।

डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों ने की सामूहिक तबादले की मांग
कर्णप्रयाग। रविवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों ने बैठक कर सामूहिक स्थानातंरण की मांग की। उन्होंने अपनी मांगों के संबंध में महानिदेशक को पत्र भेजा है।
विज्ञापन

केद्र के चिकित्साधीक्षक डॉ. राजीव शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में कहा गया कि तीन अक्तूबर को अस्पताल में प्रसूता की प्रसव के बाद मौत हो गई थी। इस पर स्वास्थ्य कर्मी पूरी सहानुभूति जताते हैं, लेकिन प्रसूता के परिजनों को भर्ती होने से पहले अस्पताल में महिला चिकित्सक की अनुपस्थिति सहित अन्य अव्यवस्थाओं के बारे में अवगत करा दिया गया था। इसके बावजूद परिजनों ने खुद की जिम्मेदारी लेते हुए प्रसूता को अस्पताल में 2 अक्तूबर को भर्ती कराया। 3 अक्तूबर को सामान्य प्रसव के बाद हुई प्रसूता की मौत के बाद कुछ लोगों ने अस्पताल परिसर में चिकित्सकों के साथ अभद्रता, गाली गलौच यहां तक कि मारपीट की कोशिश भी की। इस पर कर्मियों ने 5 अक्तूबर को विरोध जताते हुए मुख्य चिकित्साधिकारी को ज्ञापन भेजा और एक सप्ताह तक काली पट्टी बांधकर विरोध जताया, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। यही नहीं अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ सोशल मीडिया में भी लगातार गलत टिप्पणियां की जाती रही हैं। बैठक में डा. प्रकाश भट्ट, डा. मनोज मिश्रा, डा. हरीश थपलियाल, डा. उमा शर्मा, फार्मेसिस्ट सीएस नौटियाल, संजय कुमार, राजे सिंह, समीर बख्श, कविता भट्ट, मयूर बिष्ट, संतोष रैंसवाल, मनिका आदि शामिल थे।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें