अखिल भारतीय संस्कृत शोध सम्मेलन सात से
संस्कृत के विद्वान, आचार्य और शोधार्थी लेंगे हिस्सा
अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
उत्तराखंड संस्कृत अकादमी की ओर से संस्कृत के प्रचार-प्रसार एवं संवर्द्धन के लिए अखिल भारतीय संस्कृत शोध का दो दिवसीय सम्मेलन सात नवंबर से होगा।
अकादमी के सचिव गिरधर सिंह भाकुनी ने बताया कि अखिल भारतीय संस्कृत शोध सम्मेलन में वर्तमान काल में उपनिषद् वाङ्मय की उपयोगिता, यज्ञ व्यवस्था, वैश्विक चिंतन, वैज्ञानिक तत्व, ब्रह्मचिंतन आदि विषयों में शोधपत्र एवं आवेदन पत्र आमंत्रित किए गए हैं। भाकुनी ने बताया कि शोध सम्मेलन में प्रतिभाग करने के लिए छह नवंबर तक पांच पृष्ठों का संस्कृत भाषा में लिखा हुआ शोध पत्र एवं आवेदन पत्र अकादमी कार्यालय में जमा करना होगा।
प्राप्त शोध पत्रों के मूल्यांकन के आधार पर सफल प्रतिभागी का पंजीकरण किया जाएगा। सम्मेलन में प्रतिभाग करने के लिए कोई पंजीकरण शुल्क नहीं लिया जाएगा। सम्मेलन की विस्तृत जानकारी अकादमी की वेबसाइट पर हासिल की जा सकती है। शोध सम्मेलन का आवेदन पत्र अकादमी कार्यालय से भी प्राप्त किया जा सकता है।
अकादमी के सचिव गिरधर सिंह भाकुनी ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड प्राचीन काल से ही संस्कृत एवं संस्कृति के उद्गम स्थली रही है। हमारे ऋषियों ने भारतीय ज्ञान-विज्ञान परंपरा को अपनी तपस्या, चिंतन और विचार से जीवंत रखा था। आज भी उसी ज्ञान-विज्ञान और विचार को आधार मानकर विश्व के वैज्ञानिक नए नए अनुसंधान कर रहे हैं। अकादमी की ओर से आयोजित अखिल भारतीय संस्कृत शोध सम्मेलन के माध्यम से देश के विद्वानों, आचार्यों एवं शोधछात्रों को उपनिषद् वाङ्मय में निहित ज्ञान-विज्ञान परंपरा को ढूंढने का और चिंतन-मंथन करने का अवसर प्राप्त होगा।