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ट्राली से नदी पार करनी है तो करना होगा एक घंटे इंतजार

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देवाल। बोरागाड़ में लगी ट्राली से नदी पार करने के लिए स्कूली बच्चों और अन्य ग्रामीणों को एक घंटे तक लाइन लगाकर इंतजार करना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि ट्रॉली में एक बार में दो लोग ही बैठ पा रहे हैं और आवाजाही का अन्य कोई रास्ता नहीं है।
क्षेत्र पंचायत प्रमुख उर्मिला बिष्ट ने बताया कि जून 2013 में बोरागाड़ में पिंडर नदी पर बना झूला पुल बह गया था। तब से यहां ग्रामीणों को आवाजाही में दिक्कतें उठानी पड़ रही हैं। बरसात में पिंडर नदी में जलस्तर बढ़ने पर यहां बनीं अस्थायी पुलिया बह जाती है और ग्रामीणों के पास जर्जर ट्राली ही आवागमन का सहारा होता है। ऐसे में लोगों को ट्रॉली से एक छोर से दूसरे छोर तक जाने के लिए एक घंटे तक इंतजार करना पड़ता है। सुबह स्कूल जाने वाले बच्चे छह बजे ही आ जाते हैं और लाइन लगाकर ट्राली से नदी पार कर रहे हैं। जीआईसी बोरागाड़ में अध्ययनरत ऊणी बगड़, लिंगड़ी, कफल खेत, बजई, हड़ाप, सेईपातल के लगभग 80 स्कूली बच्चों में से अधिकतर समय से विद्यालय नहीं पहुंच पा रहे हैं। वहीं लोनिवि थराली के ईई विजय कुमार ने बताया कि बोरागाड़ में ढीली पड़ी ट्राली की रस्सी को ठीक करने के लिए मैकेनिक भेजा जा रहा है। जल्द ट्रालियों को दुरुस्त कर दिया जाएगा।
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ट्रॉली खराब, नापनी पड़ रही 20 किमी अतिरिक्त दूरी
थराली। चेपड़ों में पिंडर नदी पर लगी हाइड्रोलिक ट्रॉली 15 दिनों से बंद पड़ी है जिससे ग्रामीणों को 20 किमी की अधिक दूरी तय कर गांव पहुंचना पड़ रहा है। ग्रामीण त्रिलोक चंद्र देवराड़ी, खीमानंद जोशी, राकेश जोशी, केशवानंद जोशी आदि का कहना है कि चेपड़ों का झूला पुल 2013 की आपदा में बह गया था। तब यहां विभाग ने ट्रॉली लगाकर नदी के आर-पार जाने की व्यवस्था की थी लेकिन पिछले 15 दिनों से ट्रॉली ठप है। ऐसे में थराली बाजार के ठीक पार बसे त्रिकोट, सेरा, विजयपुर, बुड़जोला, जोला सहित आसपास के गांवों के ग्रामीणों को थराली से नंदकेशरी से जौला सड़क मार्ग होते हुए करीब 20 किमी की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। ग्रामीणों ने जल्द ट्रॉली ठीक करने की मांग की।
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