श्रीनगर। तहसील देवप्रयाग के अंतर्गत हिंसरियाखाल पट्टी के बुड़कोट गांव मेें जंगली सूअर के हमले से एक वृद्ध की मौत हो गई। इसके बाद से गांव में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों ने सूअरों के आतंक से निजात दिलाने की मांग की है।
बृहस्पतिवार दोपहर 12 बजे बुड़कोट निवासी नैन सिंह पंवार (76 वर्ष) घर के समीप खेतों में काम कर रहे थे। इसी दौरान जंगली सूअर ने उन पर हमला कर दिया। सूअर ने उनकी पसली तोड़ दी और आंतें बाहर निकाल दी। उनके चिल्लाने की आवाज सुनकर आसपास के लोग मदद के लिए दौड़े। लोगों को देखकर सूअर भाग गया। बुरी तरह से लहूलुहान नैन सिंह को उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज लाया गया, लेकिन उनकी खराब स्थिति देखते हुए रेफर कर दिया गया। ग्राम प्रधान पति बुड़कोट पूर्ण सिंह रावत ने बताया कि देहरादून ले जाते समय घायल नैन सिंह ने दम तोड़ दिया। तहसीलदार एसएल चौरासिया ने नैन सिंह की मौत की पुष्टि की है। इधर, वन क्षेत्राधिकारी माणिकनाथ रेंज केएस रावत का कहना है कि जंगली सूअर के हमले की रिपोर्ट मिल गई है। शासनादेश के अनुसार मुआवजा की कार्रवाई की जा रही है।
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रेफर होते- होते ही चली गई जान
जंगली सूअर के हमले से घायल हुए नैन सिंह को नहीं मिल पाया इलाज
>> श्रीनगर, एम्स ऋषिकेश, जौलीग्रांट दौड़ाते रहे घायल को
संदीप थपलियाल
श्रीनगर। लचर स्वास्थ्य सेवाओं के कारण एक बार फिर किसी के जान चली गई। यहां घायल को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल ले जाने में ही उसने दम तोड़ दिया।
बृहस्पतिवार को जंगली सूअर के हमले में घायल नैन सिंह की एक मेडिकल कॉलेज से दूसरे मेडिकल कॉलेज रेफर होते-होते ही मौत हो गई। नैन सिंह की मौत प्रदेश की स्वास्थ्य विभाग की स्थिति बयां करने के लिए काफी है। यह एक अकेले नैन सिंह की कहानी नहीं है। समय पर इलाज नहीं मिलने से कई लोग दम तोड़ देते है। जंगली सूअर के हमले में घायल नैन सिंह को राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर ले जाया गया। यहां मरहम पट्टी के बाद गंभीर स्थिति को देखते हुए हायर सेंटर एम्स ऋषिकेश रेफर कर दिया गय, लेकिन एम्स जाने के लिए उनको श्रीनगर से एंबुलेंस नहीं मिल पाई तो जैसे-तैसे प्राइवेट एबुलेंस से एम्स पहुंच पाए, लेकिन यहां मशीन न होने से जौलीग्रांट भेजा गया। नैन सिंह के पुत्र प्रकाश पंवार ने बताया कि जॉलीग्रांट में जिस डॉक्टर ने आपरेशन करना है, वह छुट्टी पर हैं। लिहाजा उनको सीएमआई या दून मेडिकल कॉलेज ले जाने को कहा।
रात लगभग साढ़े 12 बजे घायल को देहरादून ले जा रहे थे,लेकिन रास्ते में उन्होंने दम तोड़ दिया। प्रधानपति पूर्ण सिंह पंवार का कहना है कि सारे मेडिकल कॉलेज ने हाथ खड़े कर दिए। जब मेडिकल कॉलेज में ही उपचार नहीं हो सकता है, तो कहां होगा? एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल रेफर होने में ही सारा वक्त चला गया।