कर्णप्रयाग। तहसील में संचालित आपातकालीन 108 सेवा करीब एक माह (26 जुलाई) से खड़ी है। यही नहीं, जोशीमठ और देवाल की एंबुलेंस सेवा भी ठप है। इससे जरूरतमंदों और बीमारों को समय पर एंबुलेंस नहीं मिल पा रही है। लोग निजी वाहनों से मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के लिए मजबूर हैं। एंबुलेंस का संचालन कर रही कंपनी बजट का रोना रो रही है।
2008 में तत्कालीन भाजपा सरकार से पहाड़ में स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव को देखते हुए प्राथमिक उपचार से लैस 108 एंबुलेंस सेवा की शुरुआत की, लेकिन समय के साथ एंबुुलेंस में प्राथमिक उपचार के लिए लगाए गए संसाधन खराब हुए तो फिर ठीक नहीं हो पाए। इससे कर्णप्रयाग की 96 ग्राम पंचायतें ही नहीं बल्कि आदिबदरी, गैरसैंण के सीमावर्ती गांव और रुद्रप्रयाग से लगे हुए गांवों को एंबुलेंस सेवा नहीं मिल पा रही है। चमोली जिला मोटर यातायात समिति के अध्यक्ष महेश खंडूड़ी ने कहा कि सरकार पहाड़ में डाक्टरों की नियुक्ति करना तो दूर अब मरीजों को समय पर अस्पताल भी नहीं पहुंचा पा रही है। यही नहीं, एंबुलेंस में तैनात कर्मियों को तीन माह से वेतन भी नहीं दिया गया है।
एंबुलेंस सेवा के चमोली जिला प्रभारी यशवंत नेगी का कहना है कि कर्णप्रयाग, जोशीमठ और देवाल की गाड़ियों में दिक्कत होने से सेवा ठप है। कंपनी को अभी तक बजट जारी नहीं हो पाया है। इससे गाड़ियों की मरम्मत सहित वेतन के लिए समस्या हो रही है।