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राजी खुशी राखी नंदा, त्वे मैत बुलौला....

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घाट (चमोली)। बालपाटा बुग्याल में पूजा-अर्चना के बाद भक्तों ने नम आंखों से अपनी आराध्य देवी मां नंदा को कैलास के लिए विदा किया। बालपाटा में गांव-गांव से आए भक्त मां नंदा के लिए शृंगार सामग्री, ककड़ी, मक्का, संतरा, अरसा आदि सामग्री लेकर आए। ये सब सामग्री पूजा स्थल पर रखी गईं और मां नंदा की दो घंटे तक पूजा की गई। इस दौरान मां नंदा का आह्वान किया गया। मां नंदा और भूमियाल देवता ने अपने-अपने पश्वा पर अवतरित होकर भक्तों को आशीर्वाद दिया। इसके बाद नम आंखों से मां नंदा को कैलास के लिए विदा किया गया
सोमवार को सुबह नौ बजे रामणी गांव से दशोली की मां नंदा की डोली ने पूजा के बाद सैकड़ों भक्तों और छतोलियों के साथ बालपाटा बुग्याल के लिए प्रस्थान किया। रामणी गांव से प्रस्थान के दौरान महिलाओं ने राजी खुशी रौला नंदा, त्वे मैत बुलोला..., त्वेतैं समोंण नंदा झाले की काखड़ी, बाड़ों की मुंगरी..., नंदा तेरी जात पैटिगे जैसे मांगल गीत गाए। इस दौरान रामणी गांव पहुंचे देवी भक्तों ने मां नंदा को समौंण (उपहार) के रूप में सुहाग सामग्री, वस्त्र और अन्य वस्तुएं भेंट की। बालपाटा बुग्याल पहुंचने पर मां नंदा की डोली ने पंचगंगा नदी में स्नान किया। इसके बाद पूजा अर्चना कर मां नंदा और भूमियाल देवता का आह्वान किया गया। देवता के पश्वाओं ने भक्तों को आशीर्वाद दिया। इसके बाद भक्तों ने मां नंदा को कैलास विदा किया। मां नंदा को विदा करते हुए भक्त रो पड़े। इस दौरान पंडित दिनेश गौड़, मुंशी चंद्र, विपिन चंद्र, सुभाष, कृष्ण पांडे, मंशा राम, पीतांबर दत्त, सूरज सिंह पंवार, सुरेंद्र सिंह, गब्बर सिंह और अर्जुन सिंह आदि मौजूद थे।
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सेलापाटी में उमड़ी नंदा भक्तों की भीड़
घाट। बैरासकुंड क्षेत्र के सेमा गांव के नंदा देवी मंदिर में सेलापाटी त्योहार का आयोजन किया गया। भक्तों ने मां नंदा का आह्वान कर परिवार की कुशलता की कामना की। इस दौरान आचार्य ब्राह्मणों ने नंदा मंदिर में पूजा की। थराली के विधायक मगन लाल शाह ने नंदा मंदिर में मत्था टेका और मंदिर के सुंदरीकरण के लिए विधायक निधि से दो लाख रुपये देने की घोषणा की। यह त्योहार चालीस साल बाद आयोजित किया गया है। तारेंद्र प्रसाद थपलियाल का कहना है कि बैरासकुंड क्षेत्र के एक दर्जन गांवों के ग्रामीण नंदा सप्तमी पर सेलापाटी त्योहार का आयोजन करते थे, लेकिन चार दशक तक किन्हीं कारणों से यह आयोजन नहीं हो पाया। इस बार ग्रामीणों ने इस धार्मिक आयोजन के लिए एकजुटता दिखाई।
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मुख्य मंदिर में विराजमान हुईं जिठांई देवी
कर्णप्रयाग। कनखुल स्थित जिठांई देवी मंदिर में तीन दिवसीय धार्मिक आयोजन शुरू हो गया। सोमवार सुबह ग्रामीण जिठांई देवी की डोली को गांव के मंदिर में मुख्य मंदिर लाए और देवी के मंदिर में विराजमान होने के साथ ही यहां देवी अनुष्ठान शुरू हो गया। प्रधान भगवान कंडवाल ने बताया कि मेले में कपीरी पट्टी के कनखुल मल्ला और तल्ला, ग्वाड़ और डोंठला के ग्रामीण भागीदारी करते हैं। इस मौके पर आयोजन समिति के अध्यक्ष आनंद सिंह कंडवाल, भरत सिंह बिष्ट, शिव सिंह, कंडवाल, नरेंद्र सिंह कंडवाल, विशन चौधरी आदि मौजूद थे।
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