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बारिश से नीलकंठ पैदल मार्ग पर भूस्खलन,जोखिम बढ़ा

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मुश्किल भरा होगा भोले के दर पर पहुंचना
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-- बारिश से नीलकंठ पैदल मार्ग पर भूस्खलन होने जोखिम बढ़ा
-- पैदल रास्ता क्षतिग्रस्त होने से बढ़ा फिसलन का खतरा


अमर उजाला ब्यूरो
ऋषिकेश। बीते शनिवार की रात हुई बारिश के चलते स्वर्गाश्रम-नीलकंठ पैदल मार्ग पुंडरासू पानी के समीप राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क क्षेत्र में भूस्खलन के चलते बाधित हो गया। पहाड़ी से आए मलबे के कारण भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र में तीन मीटर का पैदल रास्ता अत्यधिक संकरा व फिसलन भरा हो गया है। जिसके कारण सोमवार को श्रावण मास के अंतिम सोमवार को नीलकंठ धाम में जुटने वाले पैदल यात्रियों को भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र में खतरा हो सकता है। बावजूद इसके पार्क प्रशासन ने रविवार को मार्ग को दुरुस्त करने की जहमत नहीं उठाई। विभाग द्वारा नीलकंठ के नागरिकों को मौके पर बुलाया गया मगर स्वयं अधिकारी, कर्मचारी नहीं पहुंचे।
बीते शनिवार को तड़के हुई घंटों बारिश के कारण नीलकंठ पैदल मार्ग पुंडरासू पानी के पास पार्क भूस्खलन के कारण बाधित हो गया, जिससे आए मलबे के कारण पैदल रास्ते पर करीब 20 मीटर तक मलबा जमा होने से यह अत्यधिक तंग हो गया है। जिसके चलते रविवार को श्रावण यात्रा पर नीलकंठ दर्शन को आने जाने वाले पैदल यात्रियों को यह पैच जोखिम उठाकर पार करना पड़ा। आसपास सीजनल दुकानें लगाने वाले लोगों ने मार्ग से मलबा हटाकर मुश्किल से यात्रियों के आने जाने के लिए बनाया, मगर इस पैच से एक-एक कर यात्री ही क्रास हो पा रहे हैं। मार्ग के इस हिस्से में भारी मात्रा में भूस्खलन से मिट्टी जमा होने के कारण रास्ता अत्यधिक फिसलन भरा हो गया है। जिससे लोग फिसलकर खाई में गिर सकते हैं। खासकर रात के समय क्षेत्र में पथ प्रकाश व्यवस्था नहीं होने से इसकी आशंका बनी हुई है। बावजूद इसके रविवार को पार्क प्रशासन ने नीलकंठ यात्रा के दृष्टिगत रास्ते से मलबा हटाकर इसे यात्रियों के लिए सुगम बनाना मुनासिब नहीं समझा।
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नीलकंठ के क्षेत्र पंचायत सदस्य धन सिंह राणा व तोली के प्रधान रविंद्र सिंह नेगी ने बताया कि वन विभाग की ओर से उन्हें इस बाबत सूचित कर मौके पर बुलाया गया, मगर जब वह भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र में पहुंचे तो विभागीय कोई कर्मचारी नहीं मिला। उनका कहना है कि श्रावण मास के आखिरी सोमवार को नीलकंठ में श्रद्धालुओं की आमद बढ़ने की उम्मीद है, अधिकांश श्रद्धालु पैदल यात्रा करते हैं, ऐसे में रात के समय यात्रा करने वालों के लिए भूस्खलन प्रभावित इलाके में जोखिम हो सकता है। फिसलन से लोगों के खाई में गिरने की आशंका बढ़ गई है।
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