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...मायादेवी मंदिर के नक्शे को दिया जा रहा अंतिम रूप

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कौशल सिखौला
हरिद्वार।
हरिद्वार की अधिष्ठात्री देवी मायादेवी का मंदिर बना तो यह मंदिर उत्तर भारत का सबसे भव्य और ऊंचा मंदिर होगा। इन दिनों मंदिर के नक्शे पर कईं आर्किटैक्ट काम कर रहे हैं। मंदिर की ऊंचाई को लेकर संकट बरकरार है। ऊंचाई के कारण ही मानचित्र पारित करने में प्रदेश सरकार को भी कठिनाई आ सकती है।
गौरतलब है कि पौराणिक दृष्टि से माया देवी का देशव्यापी महत्व है। यहीं वह स्थल है, जहां दग्ध होने के बाद सती की देह रखी गई थी। बाद में शिव इस देह को लेकर ब्रह्मांड में घूमे और सती के अंग टूट- टूट कर गिरते रहे। जहां- जहां ये अंग गिरे उन 52 स्थलों पर आज शक्तिपीठ विद्यमान है। मायादेवी के नाम पर ही हरिद्वार का प्राचीन नाम मायापुरी पड़ा था। शास्त्रों में हरिद्वार का जिक्र कहीं नहीं आता, जबकि मायापुरी का वर्णन जगह-जगह मिलता है। अब मायादेवी मंदिर की प्रंबधन कारिणी संस्था जूना अखाड़ा इसे विशाल मंदिर में बदलना चाहती है। मायादेवी के खाली पड़े पूरे मैदान में गर्भगृह से उठाकर शिखर सहित 251 फीट ऊंचा मंदिर बनाने की योजना कागजों पर चल रही है। बाधा यह है कि इतने ऊंचे मंदिर को भारत का विमानन मंत्रालय अनुमति नहीं देता। सुरक्षा और भूकंप की दृष्टि से भी क्षेत्र के लिए इतना ऊंचा मंदिर संकट पैदा कर सकता है। पिछले दिनों शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने सरकार की ओर से जूना अखाड़े जाकर अखाड़े के राष्ट्रीय संरक्षक श्रीमंहत हरि गिरी सहित अनेक पदाधिकारियों से लंबी वार्ता की थी। ऊंचाई को लेकर अभी तक कोई निर्णय नहीं हो पाया है।
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दूसरे विकल्प के रूप में जूना अखाड़ा चाहता है, कि जितनी ऊंचाई भारत माता मंदिर की है, उतने ऊंचे मंदिर की अनुमति मिल जाए। इस मंदिर के ऊपर कलश और त्रिशूल अधिक ऊंचाई तक स्थापित कर मंदिर की ऊंचाई बढ़ाई जाएगी। इस पर भी राज्य सरकार को आशंका है कि विमानन मंत्रालय विमानों की सुरक्षा की दृष्टि से अनुमति नहीं दगा। इन मुद्दों पर विचार विमर्श करते हुए विभिन्न विशेषज्ञों से मंथन जारी है। शीघ्र ही सरकार के इंजीनियरों के साथ बैठकर मानचित्र पर अंतिम निर्णय ले लिया जाएगा। शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक के अनुसार संतों की भावना के अनुरूप 2021 के कुंभ से पूर्व मंदिर निर्माण की भावना अवश्य पूरी की जाएगी।
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