कर्णप्रयाग (ब्यूरो)। कपीरी पट्टी के प्रसिद्ध छांतेश्वर महादेव मंदिर में सावन के पहले सोमवार पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। इस दौरान कंडारा के ग्रामीणों और महिला मंगल दल ने आकर्षक झांकी निकाली। साथ ही मंदिर में भस्मासुर नाटिका का मनमोहक मंचन किया।
कपीरी पट्टी के कंडारा गांव से दो किमी ऊपर छांती पर्वत पर छांतेश्वर महादेव का पौराणिक मंदिर है। यहां पट्टी के कंडारा, धनसारी, खत्याड़ी, कनखुल, बणसोली सहित आसपास के 50 से अधिक गांवों के लिए सावन में शिव की पूूजा करने के लिए पहुंचते हैं। इस पर हर सोमवार को यहां ग्रामीण सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति भी देते हैं। सोमवार को कंडारा ने यहां भस्मासुर नाटिका की बेहतरीन प्रस्तुति दी। साथ ही गांव से लेकर मंदिर तक शिव, पार्वती की झांकी निकाली गई। ग्रामीण विजय सिंह पंवार और सुदर्शन सिंह कंडारी ने बताया कि सावन के दूसरे सोमवार को खत्याड़ी, तीसरे सोमवार को कुनेथ और चौथे सोमवार को जस्यारा के ग्रामीण यहां शिव झांकियों और धार्मिक कार्यक्रमों का मंचन करेंगे।
दर्शन मात्र से पूरी होती है मुराद
कर्णप्रयाग। आबादी से दो किमी दूर छांती पर्वत पर होने परकी वजह से यहां शिव को छांतेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है। माना जाता है कि यहां सच्चे मन से शिवलिंग के दर्शन मात्र से श्रद्धालुओं की मुराद पूरी होती है। ब्लॉक के कंडारा गांव निवासी 69 वर्षीय बुजुर्ग भजन सिंह कंडारी कहते हैं कि छांतेश्वर महादेव में सदियों पुराना आपलिंग है। किवदंतियों के अनुसार कंडारी बताते हैं कि जबकि भस्मासुर राक्षस द्वारा शिव को भस्म करने के लिए भगवान शिव का पीछा किया गया तो भगवान शिव छांती पर्वत पर छिप गए। इस पर्वती श्रृंखलाओं के मध्य में स्थिति इस जगह को भस्मासुर नहीं देख पाया और आगे जाकर मोहनी ने भस्मासुर का बध कर दिया है। तब से यहां शिव का बसेरा हो गया।