सरकार की संविदा चिकित्सकों व पैरामेडिकल स्टाफ के कर्मियों को लेकर स्पष्ट राय न होने से चिकित्सा सेवाएं 15 अक्टूबर से प्रभावित हो सकती हैं।
1500 सौ कर्मचारी हड़ताल पर जाने की तैयारी में
एनआरएचएम के तहत संविदा पर तैनात लगभग 1500 सौ कर्मचारी हड़ताल पर जाने की तैयारी में हैं, जिसको लेकर उनके संगठन ने विभाग को ज्ञापन सौंप रखा है।
इसमें आयुष चिकित्सक, फार्मासिस्ट, स्टाफ नर्स और अन्य स्टाफ शामिल है जिसकी प्रमुख मांग नियमित करने की है, जबकि पहले ही सवा सौ टीबी नियंत्रण कार्यक्रम के कर्मचारी पहले ही हड़ताल पर हैं।
अगर सरकार इसका जल्द हल नहीं तलाश पाई तो दोहरी मार पडे़गी। पहाड़ों पर मरीजों को स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल पाएंगी चूंकि वहां स्वास्थ्य ढांचा संविदा कर्मियों के भरोसे है तो दूसरी तरफ केंद्र की सभी योजनाएं प्रभावित होने से धनराशि जारी नहीं होगी।
अनिर्णय की स्थिति
नियमित करने को लेकर टीबी नियंत्रण एसोसिएशन की मांग पर शासन ने विभागीय मंत्री को स्पष्ट कर दिया है कि नियमों के तहत संविदा कर्मियों नियमित नहीं किया जा सकता है।
सरकार को स्थिति से अवगत करवाने के बावजूद राजनीतिक दवाब के चलते हड़ताल का समाधान नहीं निकल रहा है। अब एनआरएचएम के तहत संविदा पर रखे दूसरे कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से स्थिति और विकट हो सकती है।
संविदा कर्मियों पर निर्भर है पहाड़
नियमित चिकित्सकों के पहाड़ों पर न के बराबर तैनाती होने से वहां राष्ट्रीय कार्यक्रम संचालन संविदा कर्मियों के हाथों है। बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की पौने दो सौ हेल्थ टीमों में आयुवेर्दिक चिकित्सक तैनात हैं।
वहीं एनआरएचएम में आयुष चिकित्सकों को तैनात किया गया है, जो दुर्गम इलाकों में तैनात हैं। इसके अलावा स्टाफ नर्से, फार्मासिस्ट सहित कई पद संविदा पर भरे गए हैं।
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