उत्तराखंड में मौजूद पंतनगर विश्वविद्यालय जल्द ज्यादा उपज देने वाली गेहूं की छह किस्में रिलीज करने वाला है। देशभर में कृषि योग्य भूमि कम होती जा रही है।
ऐसे में वैज्ञानिक उत्पादन बढ़ाने के साथ ही बीमारी आदि कारणों से अनाज के उत्पादन में होने वाले नुकसान को कम करने पर शोध कर रहे हैं।
हरित क्रांति की जननी पंतनगर विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिक भी गेहूं का उत्पादन बढ़ाने के लिए करीब 10 साल से शोध कर रहे हैं, जिसके परिणाम भी उत्साहवर्द्धक आए हैं।
प्रति हेक्टेयर 90 क्विंटल तक पैदावार
पंतनगर विवि के निदेशक (शोध) डा. जेपी सिंह कहते हैं कि हमारी ओर से तैयार की गईं गेहूं की छह नई किस्मों का परीक्षण देश के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग जलवायु में हो रहा है। परीक्षण में छह में से एक किस्म से ही कुछ जगहों पर प्रति हेक्टेयर 90 क्विंटल तक पैदावार रिपोर्ट हुई है।
अन्य से भी प्रति हेक्टेयर औसतन 65-70 क्विंटल तक उपज हुई है, जबकि वर्तमान में गेहूं की जो किस्में बोई जाती हैं उनसे प्रति हेक्टेयर औसतन 50 से 60 क्विंटल ही उत्पादन होता है।
डा. सिंह ने बताया कि गेहूं की इन किस्मों को जल्द रिलीज किया जाएगा और उसी वक्त इनको नाम भी दिया जाएगा। डा. सिंह कहते हैं कि इन नई किस्मों से 15 से 20 प्रतिशत तक उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है।
30 मिलियन हेक्टेयर में लगा गेहूं
पिछले साल देश में 30 मिलियन हेक्टेयर में गेहूं रोपित किया गया था। इनसे करीब 92.4 मिलियन टन पैदावार हुई। रही बात उत्तराखंड की तो राज्य में पिछले साल 3.7 लाख हेक्टेयर भूमि पर गेहूं बोया गया था, जिसमें आठ लाख टन पैदावार हुई थी।
वैज्ञानिक डा. सिंह कहते हैं कि पिछले साल राज्य में प्रति हेक्टेयर औसतन 23 क्विंटल तक उत्पादन हुआ।