चीनी मांझा ले जाओ, इससे मजबूत तो होता ही नहीं कुछ
अब अमर उजाला की टीम उस जगह पहुंच गई थी जहां चीनी मांझा बेचने में दुकानदार को कोई परेशानी नहीं थी। उल्टा दुकानदार इसकी तारीफ करते नहीं थक रहा था। कहा कि इससे अच्छा और क्या होगा। जितना मर्जी चाहो पेंच लड़ाओ। पटेलनगर क्षेत्र के इस दुकानदार ने यह भी बताया कि ये मांझा देहरादून में कहीं नहीं मिलता। इसे सहारनपुर से मंगाया जा सकता है।
यहां यह मांझा पांच रुपये का 15 मीटर बेचा गया। दुकानदार से 10 रुपये का 30 मीटर मांझा खरीदा भी गया। हालांकि, इस दुकानदार के पास ज्यादा मांझा न होने के कारण इसे फुटकर में ही थोड़ा-थोड़ा कर बेचा जा रहा था।
चीनी मांझे को लेकर सभी जगह सख्त हिदायत दी गई है। इसे बेचने वाले के खिलाफ भारी जुर्माने के साथ-साथ विधिक कार्रवाई करने का प्रावधान भी है। सभी थाना प्रभारियों को इस संबंध में दिशा निर्देश जारी किए जा चुके हैं। गली मोहल्लों की दुकानों को भी चेतावनी जारी की गई है। यदि कहीं से चीनी मांझा बेचने की शिकायत मिलती है तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - अजय सिंह, एसएसपी
ये भी पढ़ें...उत्तराखंड: अब रोशनी से वन्यजीव नहीं होंगे परेशान, दून-दिल्ली एक्सप्रेसवे के एलिवेटेड रोड पर लगेगी खास लाइटें
तो ऐसे तैयार होता है चीनी मांझा
चीनी मांझा नायलॉन और कांच जैसी सिंथेटिक सामग्री से तैयार किया जाता है। जबकि, भारतीय मांझा चावल के आटे और मसालों जैसी प्राकृतिक सामग्री से तैयार किया जाता है। चीनी मांझा अत्यधिक पैना और मजबूत होता है। यही कारण है कि देश में कई जानलेवा हादसों के बाद वर्ष 2013 में इसे कई राज्यों में प्रतिबंधित कर दिया गया था। उत्तराखंड भी इन्हीं राज्यों में से एक है।I