ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
निजी मेडिकल कॉलेजों में फीस की बढ़ोत्तरी होने से नाराज अभिभावकों ने कोर्ट की शरण जाने का निर्णय लिया है। अभिभावक संघ ने निजी मेडिकल कॉलेजों को फीस तय करने का अधिकार दिए जाने को सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन बताया है।
प्रेस क्लब में मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए संघ के मुख्य संरक्षक रविंद्र जुगरान ने बताया कि वर्ष 2006 में सर्वोच्च न्यायालय ने सभी राज्य सरकारों को निजी विवि व कॉलेजों में फीस निर्धारित करने के लिए हाई कोर्ट के अवकाश प्राप्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में शुल्क नियामक समिति गठित करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद 2006 में तत्कालीन राज्य सरकार ने शुल्क निर्धारण समिति का गठन कर एक्ट भी पारित किया था। इसके बावजूद अब कैबिनेट ने निजी मेडिकल विवि को फीस तय करने का अधिकार दे दिया और गैरसैंण सत्र में विधेयक को मंजूरी भी दिला दी। यह पूरी तरह सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अवहेलना है। उन्होंने कहा कि एक साथ कई गुना फीस बढ़ने से अभिभावकों और छात्र-छात्राओं की मुश्किलें बढ़ गई हैं। इस अवसर पर विनोद भट्ट, नेत्र सिंह चौहान, उमा पाटनी, नरेंद्र शर्मा, धनंजय बिडला, रमेश चंद्र डबराल, मुकेश नौटियाल समेत अन्य मौजूद रहे।