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भारतीय संस्कृति में गो माता का सबसे बड़ा स् थान : गोपालमणि

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भारतीय संस्कृति में गो माता का सर्वोच्च स्थान:गोपालमणि
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-- त्रिवेणीघाट पर गो कथा का शुभारंभ, गोमाता की महिमा का किया गुणगान
अमर उजाला ब्यूरो
ऋषिकेश । मध्य हिमालय के प्रख्यात कथावाचक गोपालमणि महाराज ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गाय को माता का सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। कहा कि ऋषि-मुनियों ने वेद पुराण, उपनिषद, महाभारत और रामायण आदि धर्मग्रंथों में गोमाता की महिमा का गुणगान किया है। उन्होंने कहा कि हिंदू धर्मावलंबियों को गोमाता के सम्मान के लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश में गोमाता को राष्ट्र माता का दर्जा दिया जाना चाहिए। शुक्रवार को त्रिवेणीघाट स्थित मोक्षदायिनी के तट पर गो कथा का विधिवत शुभारंभ हो गया। इस मौके पर कथावाचक गोपालमणि महाराज ने कहा कि भारतीय सनातन संस्कृति गाय की उपासना करती है। संपूर्ण धन ऐश्वर्य की कामना पूर्ण करने से ही गो माता को कामधेनु का नाम दिया गया है।
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कथाव्यास ने कहा कि भारत की समृद्धि का कारण गो माता ही है। बताया कि महात्मा गांधी अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन में कहा करते थे, कि स्वराज से अधिक गोरक्षा का महत्व है। उनका कहना है कि देश से अंग्रेजी हुुकूमत के खात्मे के बाद भी देश में गो हत्याएं बंद नहीं हो पाई। उन्होंने इसकी वजह गाय को पशु के रूप में देखा जाना बताया। कहा कि जब तक गाय को राष्ट्र माता का दर्जा नहीं दिया जाता, गो हत्या बंद होना नामुमकिन है। धार्मिक अनुष्ठान में सूरतराम डंगवाल, आचार्य राकेश सेमवाल, चंदना साधुका, सावित्री गैरोला, आरके सूरी, वीरेंद्र दत्त भट्ट, अब्बल देयी आदि मौजूद थे।
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